नई दिल्ली. सोशल मीडिया के दो बड़े प्लेटफॉर्म फेसबुक और ट्विटर पर बीजेपी, आप और थोड़े-बहुत कांग्रेस समर्थक एक-दूसरे के खिलाफ भद्र-अभद्र ट्रॉलिंग में रूटीन बनाकर लगे रहते हैं, ये बात अब बिल्कुल साफ है. लेकिन ऐसा लगता है कि सोशल मीडिया पर अरविंद केजरीवाल और राहुल गांधी समेत कांग्रेस पार्टी के और बुरे दिन आने वाले हैं.
 
आज की तारीख में ऐसा मानने की कोई वजह नहीं है कि सोशल मीडिया पर ट्रेंड के खेल में शामिल पार्टियां राजनीतिक तौर पर स्टेटमेंट सरीखे टॉपिक ट्रेंड कराने में हर तरह की तकनीक और प्रोफेशनल एजेंसियों का सहारा ले रही हैं. 
 
मूल मंत्र: नैतिक-अनैतिक कुछ भी नहीं, बस ट्रेंड होना चाहिए
 
इस खेल में शामिल पार्टियों के डिजिटल सेनापति और उनके सैनिकों के सामने नैतिक और अनैतिक से बड़ा सवाल हमेशा ये होता है कि उनका स्टेटमेंट ट्रेंड में ऊपर चल रहा है या नहीं. उनका काज-धर्म है कि अगर विरोधी पार्टी वालों ने उनकी पार्टी या उनके नेता के खिलाफ कोई ट्रेंड चला रखा है तो उसके जवाब में कितने तीखे और कितने तेज हमले किए जाएं.
 
खैर, आप पूछेंगे कि इन बातों से सोशल मीडिया पर राहुल गांधी या कांग्रेस या फिर अरविंद केजरीवाल की सेहत पर क्यों असर पड़ने वाला है तो जैसे इसका कोई सीधा संबंध नहीं है. लेकिन जैसे ही हम आपको बताएंगे कि भारतीय जनता पार्टी ने 22 मई को दिल्ली में अपने सोशल मीडिया वालंटियर्स की बैठक बुलाई है तो आप खुद समझ जाएंगे कि इस बैठक से निकलने के बाद ये स्वयंसेवक क्या करेंगे. क्या ये बताने की जरूरत है कि बीजेपी समर्थकों का फेवरिट टार्गेट कौन है.
 
बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने 22 मई को कंस्टीट्यूशन क्लब में पार्टी के सोशल मीडिया वालंटियर्स की एक बड़ी बैठक बुलाई है जिसे पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह भी संबोधित करेंगे. 
 
तकनीक का सहारा लेकर भी टॉपिक कराए जाते हैं ट्रेंड
 
जाहिर तौर पर बीजेपी अध्यक्ष शाह इन वालंटियर्स से पार्टी और नरेंद्र मोदी सरकार के अच्छे काम को लोगों तक पहुंचाने में सोशल मीडिया के भरपूर इस्तेमाल की अपील करेंगे और साथ ही ये भी कि विरोधियों के दुष्प्रचार का करारा जवाब दिया जाए.
 
सोशल मीडिया पर आप भी हैं, हम भी हैं और बाकी की दुनिया भी है. हम सबको पता चल ही चुका है कि फेसबुक और ट्विटर पर पैसे से क्या-क्या करवाया जा सकता है. हम ये भी जानते हैं कि बॉट नाम का एक सॉफ्टवेयर एक ट्वीट को सौ या हजार ट्वीट में बदल सकता है.
 
फिर भी हम इतने नादान है कि मानते ही नहीं कि सोशल मीडिया पर चल रहा ट्रेंड असल में ना तो सोशल है और ना ही ट्रेंड. दरअसल ये सब महज इंजीनियरिंग है जिसमें सौ-हजार वालंटियर को साथ लेकर आप कुछ भी ट्रेंड करा सकते हैं और किसी भी ट्रेंड की बत्ती बुझा सकते हैं.