मैसूर: मैसूर के शाही परिवार के सोने के सिंहासन का मामला देश की सबसे बड़ी अदालत में पहुंच गया है. सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल कर सोने का सिंहासन शाही परिवार से लेकर राज्य सरकार को देने की मांग कि गई है.
 
ये याचिका इतिहासकार और मैसूर यूनिवर्सिटी के रिटायर्ड प्रोफेसर पी वी नंजराजे ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की है. इससे पहले हाई कोर्ट ने जनहित याचिका को खारिज कर दिया था. 
 
शाही परिवार को सरकारी रॉयल्टी पर उठाए सवाल
प्रोफेसर नंजराजे ने अपनी याचिका में शाही परिवार की महारानी प्रमोदा देवी वाडिया को दशहरे के मौके पर हर साल मिलने वाले रॉयल्टी को लेकर सवाल उठाया है. दरअसल राज्य सरकार दशहरे के मौके पर हर साल सोने के सिंहासन के बदले शाही परिवार को रॉयल्टी देती है. 
 
1 करोड़ की रॉयल्टी दे चुकी है राज्य सरकार
 
याचिकाकर्ता के मुताबिक मैसूर पैलेस एक्ट 1995 में पास हुआ था. उसके बाद भी रानी के कब्जे में सिंहासन है. अभी तक कर्नाटक सरकार इसके एवज में 1 करोड़ की रॉयल्टी दे चुकी है.
 
याचिकाकर्ता ने ये भी सवाल उठाए हैं कि क्या ऐसे में राज्य सरकार रॉयल्टी दे सकती है जो एक्ट के मुताबिक उसके पास होना चाहिए था. याचिकाकर्ता ने मांग कि है कि शाही परिवार को रॉयल्टी न दी जाए और महारानी से सिंहासन को लेकर राज्य सरकार को दिया जाए.