नागपुर: सूखे के चपेट में महाराष्ट्र आजकल पानी के लिए तरस रहा है, लेकिन महाराष्ट्र के वाशिम जिले के कलांबेश्वर गांव में रहने वाले बापुराव ताजणे नाम के दलित युवक ने अकेले 40 दिनों के भीतर कुंआ खोद डाला, जिसमें पानी भी निकलने लगा. 
 
क्यों उठाया ये कदम?
बापुराव ताजणे की पत्नी को एक कुएं के मालिक ने पानी निकालने से मना कर दिया था और वो अपनी पत्नी की ये बेइज्जती बर्दाश्त नहीं कर पाया. उसने तय कर लिया कि जब तक पानी नहीं ढूंढ़ लेता, तब तक खुदाई करता रहेगा . यहां तक कि उसने अपने घरवालों तक की मदद नहीं ली. आम तौर पर कुआं खोदने के लिए 4-5 लोगों की जरूरत होती है लेकिन ताजणे ने यह कारनामा अकेले किया. उन्हें कुआं खोदने का कोई अनुभव नहीं था. 
 
‘ईश्वर से प्रार्थना के बाद कुंआ खोदा’
उन्होंने बताया, “पत्नी को पानी नहीं दिए जाने के बाद मैंने किसी से कुछ न मांगने की कसम खाई और मालेगांव जाकर कुआं खोदने के औजार ले आया. मैंने खुदाई शुरू कर दी. खुदाई से पहले मैंने ईश्वर से प्रार्थना की. आज मैं ऊपरवाले का शुक्रगुजार हूं की मुझे सफलता मिली. पानी नहीं देने के लिए अपने दलित होने को जिम्मेदार ठहराते हुए ताजणे ने कहा, “मैं गांव में खून-खराबा, लड़ाई-झगड़ा नहीं चाहता, लेकिन मुझे लगता है कि उसने ऐसा इसलिए किया क्योंकि हम गरीब दलित हैं. उस दिन मुझे बेहद दुख हुआ था, जिस दिन यह घटना हुई.”
 
बापुराव की मेहनत से पूरा गांव खुश
पड़ोसी खुश हैं कि उनकी पानी की परेशानी खत्म हो गई. पानी के लिए मीलों दूर नहीं जाने पड़ेगा और न ही जिल्लत सहनी होगी. फिलहाल 15 फीट गहरे कुएं को चौड़ा और गहरा करने के लिए अब बापूराव की पत्नी संगीता और पड़ोसी भी मदद कर रहे हैं. 
 
नाना पाटेकर ने की फोन पर बात
बापूराव को धीरे-धीरे इलाके में पहचान मिलने लगी है. मराठी चैनल पर उनकी कहानी देखकर नाना पाटेकर ने फोन पर बात की. एक सोशल एक्टिविस्ट ने उन्हें 5000 रुपए की मदद का वादा किया है. मालेगांव के तहसीलदार भी बापूराव की मदद करना चाहते हैं.