नई दिल्ली: गायत्री परिवार के संचालक डॉ. प्रणव पंड्या को राज्यसभा के लिए मनोनीत किया गया था. डॉक्टर पंड्या ने राज्यसभा की सदस्यता को नामंजूर कर दिया है. इस संबंध में उन्होंने कहा कि राज्यसभा में बहस का स्तर मेरे लायक नहीं हैं. प्रणव पंड्या ने शुक्रवार सुबह 10 बजे राष्ट्रपति भवन को भेजी. 
 
 
डॉ. पंड्या ने कहा कि सांसद बनना मेरे मौजूदा पद से छोटा है. हालांकि उनके मनोनयन के बाद मीडिया से जुड़ी चर्चित हस्तियों में से किसी एक को राज्यसभा के लिए मनोनीत किए जाने की अटकलों पर पूर्ण विराम लग गया था. पंड्या का कहना है कि अखिल विश्व गायत्री परिवार के लाखों सदस्यों को उनके राज्यसभा सदस्य बनने से एतराज है इसलिए भी वह राज्यसभा की सदस्यता नहीं ले सकते. पंड्या ने बताया कि अभी तक उन्होंने शपथ नहीं ली थी, इसलिए यह फैसला आज ही ले लिया. उन्होंने कहा कि किसी अन्य योग्य व्यक्ति को यह पद मिलना चाहिए. 
 
बता दें कि डॉ. प्रणव पंड्या को मोदी सरकार द्वारा राज्यसभा के लिए मनोनीत किया था. केंद्र सरकार इससे पहले छह हस्तियों को राज्यसभा में मनोनीत कर चुकी है. मोदी सरकार की ओर से 22 अप्रैल को सुब्रह्माण्यम स्वामी, नरेंद्र जाधव, नवजोत सिंह सिद्धू, सुरेश गोपी, स्वप्न दासगुप्ता और मैरी कॉम को राज्यसभा सदस्य के रूप में मनोनीत किया गया था.
 
क्या हैं डॉ. प्रणव पंड्या
डॉ. प्रणव पंड्या धार्मिक व अध्यात्मिक संगठन गायत्री परिवार से जुड़े हुए है. बता दें कि गायत्री परिवार के देश भर में करोड़ों अनुयायी हैं. विदेशों में भी इसकी हजारों शाखाएं हैं. मुंबई में जन्मे पांड्या चिकित्सा क्षेत्र में एमडी और ऑल वर्ल्ड गायत्री परिवार (एडब्ल्यूजीपी )के निदेशक हैं. इस संस्था का मुख्यालय हरिद्वार में है और यह वैदिक ऋषियों के वसुधैव कुटुम्बकम दर्शन का आधुनिक संदर्भों में प्रचार करती है. डॉ. प्रणव पंड्या BHEL के साथ भी जुड़े रह चुके हैं. वह 1979 से हरिद्वार में स्थित ब्रह्मवर्चस शोध संस्थान के डायरेक्टर के पद पर हैं. 1984-90 के बीच डॉ. पंड्या केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारियों के लिए चलने वाले ‘पर्सनैलिटी डिवलपमेंट एंड मोरल एजुकेशन’ ट्रेनिंग प्रोग्रां के भी इंचार्ज रहे.