उज्जैन: सिंहस्थ में पहुंचे स्पेन, अमेरिका, ब्राजील और यूक्रेन के लोगों भी मोक्षदायिनी क्षिप्रा में आस्था की डुबकी लगा रहे हैं, तो कोई भजन-कीर्तन कर प्रसाद ग्रहण कर रहा है तो कोई ध्यान-योग में शांति की अनुभूति करने में मग्न है. स्पेन के वार्सिलोना के ग्रेजुएट 30 वर्षीय स्टेफेनो और 23 वर्षीय आयटर कहते हैं कि कुंभ में आकर, सुखद अनुभूति हो रही है. भारत के लोगों की सामाजिक और धार्मिक समरसता और सहिष्णुता की भावना सराहनीय है. 
 
अमेरिका के कैलिफोर्निया राज्य के सैन फ्रांसिस्को के क्रस्टन क्षिप्रा नदी में स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ पवित्र डुबकी लगाकर शांति अनुभव कर रहे थे. उनका कहना है कि कुंभ में आकर ‘पीस, ज्वॉय, हैप्पीनेस’ की अनुभूति हो रही है. ब्राजील के सानपाउलो की सिविल इंजीनियर रीएल अपनी नौ साथियों बरूना, येदू, नाइस, क्रीस, आना, मास्या, सारा, कारोल तथा सिबंदा के साथ सिंहस्थ में पहुंची है. रीएल स्थानीय सिद्धाश्रम के माध्यम से ध्यान से जुड़कर इतनी प्रभावित हुई कि उन्होंने अपना नाम बदलकर ‘सत्या’ रख लिया.
 
यूक्रेन के कीव के आंद्री रूदेमक और ब्लादिमीर जूरवलो दत्त अखाड़ा घाट पर भक्ति में लीन मिले. वे ताली बजाते हुए कीर्तन कर रहे थे. उन्होंने कीर्तन के बाद प्रसाद ग्रहण कर साधु-संत के चरण स्पर्श किए. वे बताते हैं कि कुंभ का विशेष पर्व और यहां की पूजा-पद्धतियां उन्हें हमेशा से आकर्षित करती रही हैं.