नई दिल्ली. एक साल से अधिक समय से जेल में बंद सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय को गुरुवार को भी कोई राहत नहीं मिल पाई, जब सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत पर फैसला सुरक्षित रख लिया. उम्मीद की जा रही थी कि सुब्रत रॉय को गुरुवार को जमानत मिल सकती है, क्योंकि ज़मानत के लिए पांच हज़ार करोड़ रुपये कैश और पांच हज़ार करोड़ रुपये की जो बैंक गारंटी मांगी गई थी, उसके लिए सहारा ग्रुप तैयार हो गया है.

माना जा रहा था कि अगर सहारा ग्रुप ज़मानत की शर्तें पूरी कर देता है, तो सुब्रत रॉय जेल से बाहर आ सकते हैं. निवेशकों का पैसा नहीं लौटाने के मामले में सुब्रत रॉय को जेल जाना पड़ा था. कोर्ट ने 4 मार्च, 2014 से तिहाड़ जेल में बंद 65-वर्षीय सुब्रत रॉय से 26 मार्च, 2014 को कहा था कि जमानत पर रिहाई के लिए उन्हें 10 हजार करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा, जिसमें से पांच हजार करोड़ रुपये नकद और इतनी ही राशि की बैंक गारंटी देनी होगी.

मार्च में मिली थी तीन महीने की मोहलत 
सुप्रीम कोर्ट ने सहारा समूह को एक अंतिम मौका देते हुए इसी साल मार्च में पैसे जुटाने के लिए तीन माह का समय दिया था. कोर्ट ने यह साफ कर दिया था कि अगर तीन महीने में सहारा पैसे का बंदोबस्त नहीं कर सकेगा तो कोर्ट उसकी परिसंपत्तियों की नीलामी के लिए रिसीवर नियुक्त करेगी.

आपको बता दें कि सहारा समूह पर आरोप है कि उसने निवेशकों के 24 हजार करोड़ रुपए नहीं लौटाए हैं. 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने पहली बार सहारा समूह को निवेशकों के पैसे लौटाने को कहा गया था. लेकिन सेबी और सुप्रीम कोर्ट के कहने पर सहारा समूह टालमटोल करता रहा. सुप्रीम कोर्ट ने जब सुब्रत रॉय को अदालत में पेश होने को कहा तो वे आनाकानी करते रहे और कभी अपनी मां की तबीयत खराब होने तो कभी कुछ और कारण बताकर कोर्ट से कई सुनवाइयों पर गैरहाजिर रहे. उसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कड़ाई बरतते हुए पुलिस को निर्देश दिया कि वे सुब्रत रॉय को कोर्ट में पेश करें. इसके बाद लखनऊ पुलिस ने सुब्रत रॉय को सहारा शहर, लखनऊ से लेकर दिल्ली पहुंची और कोर्ट में पेश किया.

IANS