गाजियाबाद. केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की एक स्थानीय अदालत ने नोएडा के मुख्य इंजीनियर यादव सिंह की न्यायिक हिरासत अवधि तीन दिनों के लिए बढ़ा दी. भ्रष्टाचार के आरोपों के तहत उन्हें बीते महीने गिरफ्तार किया गया था. यादव सिंह की न्यायिक हिरासत शनिवार को समाप्त होने के बाद सीबीआई ने उन्हें सीबीआई के विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार-रोधी) जी.श्रीदेवी के समक्ष पेश किया. विशेष न्यायाधीश ने हिरासत अवधि को 29 मार्च, 2016 तक के लिए बढ़ा दी. 
 
सीबीआई ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 120बी (आपराधिक षड्यंत्र), भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा 13 (1)(डी) व 1988 (आपराधिक कदाचार) के तहत 15 मार्च को यादव सिंह, उनकी पत्नी व 13 अन्य के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था. 
 
यादव सिंह पर आरोप है कि उन्होंने परिचितों को 10 हजार करोड़ रुपये का ठेका दिया और नोएडा, ग्रेटर नोएडा व यमुना एक्सप्रेसवे पर कई शीर्ष बिल्डरों को ग्रुप हाउसिंग, कॉमर्शियल तथा इंस्टीट्यूशनल प्लॉट्स का आवंटन किया. यादव सिंह नोएडा, ग्रेटर नोएडा व यमुना एक्सप्रेसवे प्राधिकार के मुख्य इंजीनियर के पद पर रह चुके हैं. 
 
सीबीआई की जांच में इस बात का खुलासा हुआ है कि कार्यो के आवंटन का फैसला पहले से निर्धारित होता था और टेंडर देने में नियमों का उल्लंघन किया जाता था, जिसके कारण ठेकेदारों को भारी मुनाफा होता था. इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई ने बीते साल 30 जुलाई को 92.02 करोड़ रुपये लागत के अंडरग्राउंट केबल डालने में भ्रष्टाचार के लिए यादव सिंह व अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ एक मामला दर्ज किया था. 
 
उत्तर प्रदेश पुलिस ने जून 2012 में यादव सिंह व अन्य के खिलाफ एक मामला दर्ज किया था. उन पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने नियम कानूनों को ताक पर रखकर ठेकेदारों को ठेके दिए, जिससे उन्हें व ठेकेदारों को भारी मुनाफा हुआ. 
 
बीते साल अगस्त में यादव सिंह से संबंधित आगरा व फिरोजाबाद तथा नोएडा व ग्रेटर नोएडा में 12 ठिकानों सहित कुल 14 ठिकानों पर छापेमारी की गई. इस दौरान नोएडा और आगरा में अचल संपत्तियों के 38 दस्तावेज बरामद किए गए. सीबीआई ने यादव सिंह को तीन फरवरी, 2016 को गिरफ्तार कर लिया था.