नई दिल्ली. होली रंगों का त्यौहार है. इस दिन हर कोई एक दूसरे को रंगों में रंगना चाहता है. कई रंगों के गुलाल लोग लगाते हैं. लेकिन जरूरी नहीं कि हम जिन रंगों से खेलते हैं वह भी होली के त्यौहार की तरह हमारे लिए अच्छे हो.
 
आजकल रंग बनाने के लिए जिन केमिकल्स का इस्तेमाल किया जाता है वह सेहत के लिए हानिकारक होते हैं. जिस गुलाल को हम बुरा न मानो होली है कहकर एक दूसरे को लगाते हैं वह अनजाने में ही सही लेकिन लोगों की सेहत पर बहुत बुरा असर डालता है. गुलाल में कांच के टुकड़ो का इस्तेमाल किया जाता है जिससे लोगों की आंखों को हानि पहुंच सकती है.
 
होली का त्यौहार ज्यादातर खुले आसमान में खेला जाता है, जिससे सूर्य की गर्मी से भी त्वचा पर विपरित प्रभाव पड़ता है. खुले आसमान में हानिकारक यूवी किरणों के साथ-साथ नमी की कमी की वजह से त्वचा के रंग में कालापन आ जाता है. होली खेलने के बाद त्वचा निर्जीव बन जाती है. इसके अलावा रंगों में मिले केमिकल्स की वजह से स्किन को नुकसान होता है. इससे खुजली हो सकती है कभी कभी सूजन भी आ सकती है.