नई दिल्ली. नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने कहा कि दूरसंचार विभाग द्वारा नई लाइसेंसिंग व्यवस्था के तहत रिलायंस जिओ इंफोकाम को वॉयस कालिंग सेवा कारोबार की अनुमति दिए जाने से कंपनी को 3,367.29 करोड रुप का अनुचित लाभ हुआ. रिलायंस इंडस्टरीज लि. ने 2010 में इंफोटेल ब्रॉडबैंड का अधिग्रहण किया था. तब एक लाइसेंस व्यवस्था से दूसरी में प्रवेश के लिए रिलायंस ने 1,658 करोड रुपए अतिरिक्त माइग्रेशन शुल्क जमा कराया. यह माइग्रेशन शुल्क 2001 में निर्धारित मूल्य के आधार पर दिया गया. इससे मेसर्स रिलायंस जिओ इंफोकाम को 3,367.29 करोड़ रुपये का अनुचित लाभ हुआ. इंफोटेल ने उससे पहले स्पेक्ट्रम नीलामी में अखिल भारतीय ब्राडबैंड सेवा के लिए ‘ब्राडबैंड वायरलेस एक्सेस’ (बीडब्ल्यूए) स्पेक्ट्रम हासिल किया था, जिसका उपयोग 4जी सेवाओं के लिए किया जा सकता है पर इस लाइसेंस के तहत वायस सेवा की अनुमति नहीं थी.

दूसरी तरफ रिलायंस जियो ने इसका जवाब देते हुए कहा, ‘हम अपना कारोबार हमेशा लागू कानूनों के अनुसार करते हैं और दूरसंचार विभाग तथा अन्य नियामकीय प्राधिकरणों द्वारा तय नियम तथा दिशानिर्देशों का अनुपालन करते हैं. हमने अपना सभी स्पेक्ट्रम बाजार मूल्यों के अनुसार खुली और पारदर्शी बोली प्रक्रिया में हासिल किया है. इसकी शर्तें सभी बोली लगाने वाली कंपनियों के लिए समान थी. इसके अलावा बीडब्ल्यूए स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल करते हुए सेवाओं के लिए संबंधित लाइसेंस हासिल करने के लिए दूरसंचार विभाग के नियम भी सभी सफल बोली लगाने वालों के लिए एक जैसे थे.’