नई दिल्ली. विश्व हिंदू परिषद (विहिप) का कहना है कि जमीयत उलेमा-ए-हिन्द का राष्ट्रीय एकता सम्मेलन राष्ट्रीय एकता तोड़ने वालों का जमावड़ा सिद्ध हुआ है. विहिप के अंतर्राष्ट्रीय संयुक्त महामंत्री सुरेन्द्र जैन ने एक बयान में ईसाई धर्मगुरु जॉन दयाल, कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर और राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार उमर खालिद के पिता की सम्मेलन में मौजूदगी पर सवाल उठाया है. विहिप का कहना है कि कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद व सोनिया गांधी ‘भी देश तोड़ने वालों की भूमिका में ही दिखाई दे रहे थे. वोट बैंक के लिए इन दोनों ने मयार्दाओं को तार-तार कर दिया.’ 
 
उन्होंने कहा कि ‘राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) से तुलना इस बात को दर्शाता है कि वे चंद वोटों के लिए देश के हितों को कुर्बान कर सकते हैं.’ विहिप नेता ने पूछा है कि ‘क्या कांग्रेस नेता समझते हैं कि भारत का मुस्लिम समाज आईएस के साथ सहानुभूति रखता है? उन्होंने अपने इस बयान से भारतीय मुस्लिम समाज की छवि को बेदर्दी के साथ खराब कर, उसकी देशभक्ति को कटघरे में खड़ा करने का पाप किया हैं.’ 
 
उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को इस बयान के लिए राष्ट्र से अविलम्ब माफी मांगनी चाहिए. इसके अलावा गुलाम नबी आजाद को कांग्रेस से बाहर का रास्ता दिखाना चाहिए. विहिप नेता ने आरोप लगाया कि आजाद ने सफेद झूठ बोल दिया कि सोनिया ने उर्दू में हस्ताक्षर किए हैं. पत्र को देखने पर साफ हो जाता है कि हस्ताक्षर हिन्दी में हैं. उस पर भी संदेह है कि भाषा तो उनकी नहीं है, हस्ताक्षर भी उनके नहीं होंगे.
 
विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल द्वारा जारी इस बयान में यह भी कहा गया कि ‘सोनिया गांधी यदि गुलाम नबी आजाद पर कार्रवाई नहीं करतीं तो उन्हें कुछ बातों का उत्तर देना पड़ेगा. प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने गणतंत्र दिवस परेड में संघ की टोली को सम्मिलित किया था. सोनिया जी को बताना पड़ेगा कि अब वह नेहरू जी के बारे में क्या सोचती हैं? दूसरा, उनके पति स्वर्गीय राजीव गांधी भारत में रामराज्य चाहते थे, जबकि वह राम मंदिर का विरोध कर रही हैं. क्या कोई भारतीय पत्नी अपने स्वर्गीय पति की इच्छा के विरुद्ध काम कर सकती है?’