बेंगलुरु. उल्सूर झील के किनारे हजारों मरी हुई मछलियों मिली. इन मरी हुई मछलियों को देखकर लोग दंग रह गए. मॉर्निंग वॉक पर गए लोगों ने इन्हें सबसे पहले देखा और फिर कुछ देर बात तो यहां लोगों की भीड़ लग गई. हालांकि इन मछलियों की मौत की एक वजह जल प्रदूषण को भी माना जा रहा है. उलसूर वेलफेयप सोसाइटी के अध्यक्ष वी पुरुषोत्तम का कहना है कि सीवेज के कारण पानी के ऑक्सीजन का स्तर एक दम गिर गया है. इसलिए दम घुटने से मछलियों की मौत हुई है.
 
‘हर साल मार्च में होती है यह घटना’
इस घटना को लेकर कर्नाटक राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पूर्व चेयरमैन का कहना है कि यहां हर साल मार्च में यह घटना होती है. इसके अलावा मछलियों के मौत के कारण बताते हुए उन्होंने कहा कि तालाब में ऑक्सीटजन का स्तर कम होने से इन जीवों की इस तरह मौत हो जाती है और इसका मुख्य कारण शहर के सीवेज का तालाब में छोड़ा जाना है. उन्होंने आगे बताया कि यह गंदगी तालाब के पानी को गंदा करने के साथ ही ऑक्सी जन की मात्रा भी कम कर देता है और जल जीवों की मौत हो जाती है.
 
तालाब पर 3 एजेंसियों का नियंत्रण
उलसूर लगभग 108 एकड़ में फैला है और लोगों के बीच काफी प्रचलित है. तालाब पर तीन एजेंसियों का नियंत्रण है. मद्रास सैप्पर्स यानी सेना, दूसरी एजेंसी है कर्नाटक फायर और इमरजेंसी सर्विसेज जो इसका इस्तेमाल ट्रेनिंग के लिए करता है.  साथ  ही कर्नाटक लेक ऑथरिटी ने इसके एक हिस्से को कर्नाटक पर्यटन विभाग को लीज पर दिया है. जो यहां रेस्टॉरेंट चलाता है और पर्यटकों के लिए बोटिंग करता है.