नई दिल्ली. भारतीय जनसंचार संस्थान ने जातिवादी टिप्पणी करने और एक वरिष्ठ शिक्षिका के लिए अभद्र व आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल करने के लिए दो छात्रों को तीन हफ्तों के लिए छात्रावास से निष्कासित कर दिया है. 
 
संस्थान ने जहां हिंदी पत्रकारिता के छात्र उत्कर्ष सिंह को अनुसूचित जाति व जनजाति को मिल रहे आरक्षण के मुद्दे पर सोशल मीडिया में अपमानजनक टिप्पणी करने के लिए तीन हफ्तों के लिए छात्रावास से निष्कासित किया है. तो वहीं प्रशांत कनौजिया नाम के छात्र को संस्थान की एक शिक्षिका के लिए वाट्सएप ग्रुप में ‘अभद्र और अश्लील भाषा’ का इस्तेमाल करने के लिए एक हफ्ते के लिए छात्रावास से निकाला गया है. 
 
बता दें कि प्रशांत कनौजिया अनुसूचित जाति व जनताति समुदाय पर हुई टिप्पणी के मामले में शिकायतकर्ताओं में से एक था.
 
उत्कर्ष सिंह द्वारा की गई जातिवादी टिप्पणी के मामले में एक जांच कमेटी का गठन हुआ था. कमेटी ने जांच के बाद पाया कि उत्कर्ष द्वारा फेसबुक पर आरक्षण के मुद्दे पर की गई जातिवादी टिप्पणी में ‘उत्तेजक भाषा’ का इस्तेमाल किया गया था. जिसके बाद उसे तीन हफ्तों के लिए छात्रावास से निष्कासित कर दिया गया. उत्कर्ष ने इस मामले में संस्थान प्रशासन व हॉस्टल वॉर्डन को पत्र लिख कर इस आदेश पर पुनर्विचार करने की अपील की है.
 
संस्थान के अंग्रजी पत्रकारिता पाठ्यक्रम के छात्र प्रशांत कनौजिया को एक वरिष्ठ शिक्षिका को लेकर वाट्सएप ग्रुप में ‘अभद्र व अश्लील’ टिप्पणी करने के लिए एक हफ्ते के लिए निष्कासित किया गया. जिसकी शिकायत 4 फरवरी को संस्थान प्रशासन को की गई थी.
 
बता दें कि आईआईएमसी सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अंतर्गत संचालित होता है.