नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से रेप पीड़ितों और यौन उत्पीड़न के शिकार लोगों को मुआवजा देने के लिए गोवा जैसी योजना के समान ‘एक समान योजना’ बनाने का निर्देश दिया. न्यायमूर्ति एम.वाई.इकबाल और न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की पीठ ने कहा, “सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश रेप पीड़ित/यौन उत्पीड़न की शिकार महिलाओं और विकलांग महिलाओं को कानून के तहत मुआवजा देने के लिए एक समान योजना बनाएं.”
 
कोर्ट ने इस बात का उल्लेख किया कि रेप पीड़ितों को मुआवजा देने के मामले में राज्यों में काफी अलग-अलग नीति है. गोवा पीड़ित को 10 लाख देता है, जबकि हिमाचल प्रदेश और अरुणाचल प्रदेश ‘बहुत कम धनराशि’ 50 हजार ही देते हैं. महाराष्ट्र तो कुछ भी नहीं देता.
कोर्ट ने कहा कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मुआवजे के लिए एकसमान योजना बनाने के दौरान रेप पीड़ितों के लिए गोवा की योजना का जरूर संज्ञान लेना चाहिए.
 
कोर्ट ने यह निर्देश छत्तीसगढ़ के टेकराम की याचिका खारिज करने के दौरान दिया. टेकराम ने एक नेत्रहीन लड़की के यौन उत्पीड़न के मामले में मिली सात साल कैद की सजा के खिलाफ याचिका दायर की थी. कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार को आदेश दिया कि वह पीड़ित नेत्रहीन लड़की को उसके पूरे जीवन तक हर महीने 8 हजार रुपये दे.