कोलकाता. एलजीबीटी समुदाय ने सुप्रीम कोर्ट के समलैंगिक संबंधों को अपराध करार देने वाली भारतीय दंड संहिता की धारा 377 पर पुनर्विचार के लिए दायर सुधारात्मक याचिका को पांच सदस्यीय पीठ को सौंपने के निर्णय की सराहना की है. शुरू में याचिका के खारिज होने से आशंकित एलजीबीटी समुदाय ने अदालत के निर्णय को ‘सही दिशा में बढ़ाया गया एक कदम’ बताया. 
 
एलजीबीटी अधिकारों के लिए काम करने वाले कार्यकर्ता पवन ढाल ने कहा, “हमें डर था कि याचिका खारिज कर दी जाएगी, लेकिन अब हम अगली सुनवाई का इंतजार कर रहे हैं.” 
 
कोलकाता वासी सामाजिक कार्यकर्ता समलैंगिक सौविक ने इसे सकारात्मक बताया है. उन्होंने कहा, “देखते हैं आगे क्या होता है..एलजीबीटी समुदाय मजबूती से एक-दूसरे के साथ है और हमें आम लोगों से भी समर्थन की उम्मीद है, खासकर युवाओं से, क्योंकि वे बेहतर तरीके से लैंगिक मुद्दों को समझते हैं.”
 
सुप्रीम कोर्ट की पांच न्यायाधीशों वाली संविधान पीठ अब गैर सरकारी संगठन नाज फाउंडेशन और अन्य द्वारा दायर सुधारात्मक याचिका पर सुनवाई करेगी. याचिका में सुप्रीम कोर्ट द्वारा ही समलैंगिक संबंधों को अपराध करार देने वाली धारा 377 की वैधानिकता को मंजूरी देने वाले कोर्ट के ही एक फैसले पर पुनर्विचार की मांग की गई है.