तिरुअनंतपुरम. केरल के मुख्यमंत्री ओमेन चांडी से न्यायिक आयोग ने सौर ऊर्जा से जुड़े एक घोटाले में पूछताछ के दौरान सवाल किया कि क्या उनकी या उनके कार्यालय की इस मामले में कोई प्रत्यक्ष भूमिका थी. चांडी ने सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जज के सामने दिए जवाब में इस घपले में किसी भी तरह की संलिप्तता से साफ इंकार किया है.

बीजू राधाकृष्णन और सरिता एस. नायर नामक युगल पर स्वच्छ ऊर्जा और सौर पैनल उपलब्ध कराने के वादे के बदले उद्योगपतियों से करोड़ों रुपये ऐंठने का आरोप है. साल 2013 में पता चला कि उनकी बताई यह ‘योजना’ दरअसल ठगी है. इसके बाद विपक्ष ने आरोप लगाया कि इस युगल ने ठेके हासिल करने के लिए मुख्यमंत्री चांडी और उनके कार्यालय का नाम इस्तेमाल किया था.

अपनी पत्नी की हत्या के आरोप में जेल में बंद राधाकृष्णन ने मामले की जांच कर रहे जज को बताया था कि चांडी ने निजी रूप से उसी के हाथों से लगभग पांच करोड़ रुपये रिश्वत के तौर पर लिए.

राधाकृष्णन का दावा था कि अन्य रकमें मुख्यमंत्री के सहयोगियों को दी गईं. कांग्रेस पार्टी के नेता ओमेन चांडी बार-बार इन आरोपों का खंडन करते रहे हैं, लेकिन इसी घोटाले के सिलसिले में उन्हें अपने कार्यालय से दो महत्वपूर्ण सहयोगियों को बर्खास्त करना पड़ा था.

सरकार की नई शराबबंदी नीति के तहत बंद किए जाने वाले बारों में से 400 को दोबारा खोले जाने में मदद करने के आरोपों में चांडी के दो मंत्री इस्तीफा दे चुके हैं.

राधाकृष्णन का कहना है कि मुख्यमंत्री ने सौर ऊर्जा परियोजना के लिए मुफ्त ज़मीन उपलब्ध कराने की पेशकश की थी, अगर उन्हें मुनाफे में हिस्से की गारंटी दी जाए. शुरुआती जांच के दौरान मुख्यमंत्री चांडी के कार्यालय में मारे गए छापों में जांचकर्ताओं ने कम्प्यूटरों और उनकी हार्डडिस्क को सबूत के तौर पर जब्त किया था.