पटना. बिहार सरकार ने राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद, उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और स्वास्थ्य मंत्री तेज प्रताप यादव समेत 262 राजद कार्यकर्ताओं के खिलाफ अदालत में चल रहे एक आपराधिक मुकदमा को वापस ले लिया है.

सरकार के इस आदेश के तहत अभियोजन पदाधिकारी ने पटना सीजेएम की अदालत में एक आवेदन दाखिल कर यह आपराधिक मुकदमा वापस लेने और आरोपितों को आरोप मुक्त करने का अनुरोध किया गया था.

अभियोजन के इस आवेदन पर सुनवाई करने के बाद पटना सीजेएम ने आरोपित राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव, उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, स्वास्थ्य मंत्री तेज प्रताप यादव, विधायक भोला यादव समेत 262 आरोपित राजद कार्यकार्ताओं को आरोप से मुक्त कर दिया है. साथ ही उनके खिलाफ चल रहे आपराधिक मुकदमा का निष्पादन कर दिया है.

क्यों  दर्ज हुआ था केस

बिहार बंद के दौरान सड़क पर प्रदर्शन के इस आपराधिक मामले में पुलिस ने राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव समेत 262 राजद कार्यकताओं के खिलाफ गैर जमानतीय धाराओं में चार्जशीट किया था. इसके बाद अदालत ने सभी आरोपितों के खिलाफ संज्ञान लेकर उनकी उपस्थिति के लिए सम्मन जारी करने का आदेश दिया था.

27 जुलाई 2015 को राजद के आह्वान पर बिहार बंद का आयोजन किया गया था। बंद के समर्थन में राजद कार्यकताओं ने कोतवाली थाना क्षेत्र के सड़क और डाकबंगला के पास सड़क जाम कर उग्र प्रदर्शन किया. इस दौरान प्रर्दशनकारियों पर समुचित कार्रवाई नही करने और पुलिस निष्क्रियता को लेकर पटना हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया था.

इसके बाद पटना पुलिस ने त्वरित कारवाई करते हुए राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद समेत कई बडे़ राजद नेताओं के खिलाफ कोतवाली थाना के इंस्पेक्टर रमेश प्रसाद सिंह ने अपने बयान पर थाने में एक आपराधिक मामला दर्ज किया था.