नई दिल्ली. मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने कहा है कि सरकार को पठानकोट में वायुसेना के एयरबेस पर आतंकी हमले का जवाब देने में हुई विफलताओं को स्वीकार करना चाहिए और मामले की ‘यथोचित जांच’ करानी चाहिए. माकपा ने साथ ही सरकार से आग्रह किया है कि सरकार को पाकिस्तान के साथ अपनी प्रस्तावित वार्ता पर टिके रहना चाहिए. पार्टी ने कहा कि इसके उलट कोई भी कार्रवाई ‘केवल देश के रणनीतिक विकल्पों को ही संकुचित करेगी.’ 
 
माकपा के मुखपत्र पीपुल्स डेमोक्रेसी के संपादकीय में लिखा गया है, “मोदी सरकार को यह मानना ही चाहिए कि विफलताएं हुई हैं जिन्होंने कई परेशान करने वाले सवाल खड़े किए हैं. सरकार को इसे प्रतिष्ठा से नहीं जोड़ना चाहिए. कमियों को स्वीकार करना चाहिए और यथोचित जांच करानी चाहिए ताकि आगे से ऐसी गलतियां न हों.”
 
संपादकीय में लिखा गया है कि जिस बात की तुरंत जरूरत है वह आतंकी कार्रवाई को दिए गए अव्यवस्थित और अस्थिर जवाब की समीक्षा है. यह बताते हुए कि कुछ सुरक्षा विशेषज्ञों ने पठानकोट की घटना को असफलता बताया है, संपादकीय में लिखा गया है, “पूरे आपरेशन से कई सवाल खड़े हुए हैं.”
 
संपादकीय में पूछा गया है कि हमले की पर्याप्त चेतावनी मिलने के बावजूद आतंकी वायुसेना एयरबेस में घुसने में कैसे कामयाब हो गए. इसमें पूछा गया है कि सेना को तलाशी अभियान के लिए क्यों नहीं बुलाया गया जबकि पठानकोट में ही एक बड़ा सैन्य अड्डा मौजूद है.