लखनऊ. कालेधन के मुद्दे पर पतंजलि ब्रांड के स्वामी, बाबा रामदेव की चुप्पी को लेकर कांग्रेस पार्टी और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) ने उन पर हल्ला बोला है. कांग्रेस ने कहा कि पहनावे से साधु दिखने वाले रामदेव कब क्या कहें, कोई भरोसा नहीं है. वहीं राकांपा ने कहा कि बाबा योगगुरु से अब व्यापारी बन गए हैं. वह पहले भी बीजेपी के एजेंट थे और आज भी हैं.
 
बाबा रामदेव दो दिन पहले लखनऊ में अपने आउटलेट का उद्घाटन करने आए थे. पत्रकारों ने उनसे पूछा था कि ‘कालेधन की अभी तक वापसी नहीं हो पाई है, जबकि आपने कहा था कि नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने तो 15 दिनों के भीतर कालाधन वापस आएगा. डेढ़ साल से ज्यादा बीत गए, क्या इस मुद्दे को लेकर आप आवाज नहीं उठाएंगे?’
 
बाबा ने मुस्कराते हुए जवाब दिया, “कालेधन को लेकर अभी आवाज उठाएंगे तो कहा जाएगा कि मैं सबसे लड़ता रहता हूं.” 
 
उनके इस बयान की आलोचना करते हुए राकांपा के प्रदेश अध्यक्ष के.के. शर्मा ने कहा कि बाबा रामदेव ने यूपीए सरकार के अच्छे कामों को मटियामेट करने के लिए ही कालेधन का मुद्दा उठाया था. उनका मकसद पूरा हो गया, अब चुप हैं.
 
उन्होंने कहा कि रामदेव पहले भी बीजेपी के एजेंट थे और आज भी बतौर एजेंट कार्य कर रहे हैं. कालेधन के खिलाफ हल्ला बोलने के पीछे बाबा की मंशा सिर्फ और सिर्फ संप्रग सरकार को अस्थिर करने का प्रयास था.
 
यूपी कांग्रेस कमेटी के मीडिया एवं कम्युनिकेशन विभाग के उपाध्यक्ष वीरेंद्र मदान ने कहा कि जिस व्यक्ति का आप नाम ले रहे हैं, वह कब और क्या कह देगा, इस पर भरोसा नहीं किया जा सकता.