मुंबई. शिवसेना ने सऊदी अरब के इतिहास में महिलाओं को पहली बार निकाय चुनाव लड़ने और उसमें मतदान करने के अधिकार को लेकर कहा कि सऊदी में महिला क्रांति का उदय हुआ है. पिछले साप्ताहांत हुए चुनाव में कुल 7,000 उम्मीदवारों में से 979 महिला उम्मीदवारों ने भी भाग्य आजमाया, जिनमें से 20 महिलाओं को जीत भी हासिल हुई है.
 
 
शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना के संपादकीय में लिखा है, “भारत के लिए भले ही यह सामान्य हो, लेकिन सऊदी अरब में यह किसी क्रांति से कम नहीं है. वहां की महिलाओं को अकेले वाहन चलाने का भी अधिकार नहीं है.” शिवसेना ने कहा कि सऊदी अरब को महिलाओं पर सख्ती से धार्मिक अनुशासन लागू करने के लिए जाना जाता है, जिनमें एक सख्त ड्रेस कोड, सार्वजनिक आंदोलनों में शिरकत पर कड़ा प्रतिबंध और कई अन्य प्रतिबंध शामिल हैं और महिला विरोधी कानूनों वाला ‘मुल्ला राज’ सुनिश्चित करता है कि महिलाएं इन्हें सहें.
सेना ने कहा, “महिलाओं को निर्वाचन प्रक्रिया में भाग लेने की इजाजत देना सचमुच पुरुष शासकों की उदारता है. ऐसा लिंग भेद किसी भी विकसित समाज में अकल्पनीय है.”