पुणे. देश भर के कई राज्यों में अकाल और सूखे की वजह से किसान आत्महत्या कर रहे हैं. सूत्रों की मानें तो इस लिस्ट में महाराष्ट्र का नाम पहले नंबर पर है. अन्य राज्यों जैसे आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी आत्महत्या के मामले देखने को मिले है.
 
आंकड़ें बताते है किसानों की दुर्दशा
 
पिछले साल के आंकड़ों को देखा जाए तो साल 2014 में जितने किसानों ने आत्महत्या की उनमें 90 प्रतिशत से ज्यादा इन्ही राज्यों से जुड़े थे. जानकारी के अनुसार इन राज्यों में भी महाराष्ट्र का नाम सबसे पहले था. कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री मोहनभाई कुंडारिया ने सदन को लिखित रूप में रिपोर्ट दी जिसमे उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में सबसे अधिक महाराष्ट्र में 2,568 किसानों और 1,436 कृषि श्रमिकों ने आत्महत्या की है.
 
सरकार ने राज्यसभा को सूचित किया कि विभिन्न कारणों से साल 2014 में 12,360 किसानों और श्रमिकों ने आत्महत्या की है. तेलंगाना में 898 किसानों और 449 श्रमिकों ने आत्महत्या की जबकि मध्यप्रदेश में यह आंकड़ा 826 से 372 के बीच रहा.
 
केरल में 700 कृषि श्रमिकों और 107 किसानों ने आत्महत्या की है. पश्चिम बंगाल में सिर्फ 230 कृषि श्रमिकों ने आत्महत्या की. अभी तक कुल मिलाकर 5,650 किसानों और 6,710 श्रमिक अपनी जान दे चुके हैं.  कुंडारिया ने कहा कि आत्महत्या करने की कई वजह हैं जिनमें कर्ज, दिवालियापन, फसल नुकसान होना, प्राकृतिक आपदा, उत्पादों को बेचने में असमर्थता, गरीबी, पारिवारिक समस्याएं, बीमारी आदि शामिल हैं.