नई दिल्ली. बीजेपी के सीनियर नेता मुरली मनोहर जोशी ने आज कहा कि आईआईटी और आईआईएम जैसे प्रमुख शिक्षण संस्थानों की स्थिति बुरी है जो केवल विकसित देशों को पूंजी ट्रांसफर में ही योगदान देते हैं. देश का युवा ‘कपड़ा निर्माता’ के बजाय ‘दर्जी’ बनकर रह जा रहा है. जोशी ने सुझाव दिया कि सरकार को विकास योजनाएं शुरू करने से पहले देश की तकनीकी शक्ति का आकलन करना चाहिए.
 
उन्होंने कहा कि आईआईटी और आईआईएम खराब स्थिति में हैं. वे केवल विकसित देशों को पूंजी ट्रांसफर में योगदान दे रहे हैं. हम यहां अवसर पैदा नहीं कर रहे और इन संस्थानों से उत्तीर्ण होने वाले छात्र केवल दूसरे देशों की बहुराष्ट्रीय कंपनियों के प्रबंधन में योगदान दे रहे हैं. वह पीएचडी चैंबर द्वारा शैक्षणिक-औद्योगिक इंटरफेस को संस्थागत बनाने के विषय पर आयोजित पांचवें राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे.
 
कानपुर से लोकसभा सदस्य जोशी ने कहा कि देश प्रौद्योगिकी का निर्माण करने के बजाय प्रौद्योगिकी दूसरे देशों से लेने पर अधिक ध्यान दे रहा है जिससे शिक्षित युवा ‘कपड़ा निर्माता’ के बजाय ‘दर्जी’ बनकर रह जा रहे हैं. 
 
जोशी ने कहा कि सरकारों को यह समझने की जरूरत है कि उन्हें इस तरह की योजनाओं पर आगे बढ़ने से पहले देश की प्रौद्योगिकी शक्ति का आंकलन करने की जरूरत है ताकि उनसे देश को दीर्घकालिक नुकसान नहीं हो.