मेलबर्न. आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) की नजर आस्ट्रेलिया के किशोरों पर है. संगठन में लोगों को भर्ती करने वाले (रिक्रूटर) इन किशोरों और युवाओं तक सोशल मीडिया के जरिए पहुंच रहे हैं. यह नतीजा फेसबुक पोस्ट के अध्ययन से निकला है. एबीसी डाट नेट डाट एयू की रिपोर्ट के मुताबिक, निगरानी विशेषज्ञ रॉबिन तोरोक ने यह अध्ययन किया है. 
 
वह 2010 से सोशल मीडिया पर आईएस के भर्ती करने वालों की कारगुजारियों पर निगाह रखे हुए हैं. उन्होंने बताया है कि किस तरह भर्ती करने वाले ये लोग युवाओं में समाज में अलग-थलग होने के अहसास का दोहन करते हैं. सबसे पहले आईएस आतंकी फेसबुक पर पोस्ट की जाने वाली सामग्री पर ध्यान देते हैं.
 
युवाओं पर रखते हैं नजर
 
तोरोक ने कहा कि ये लोग खास कर किशोरों को निशाना बनाते हैं, क्योंकि वे अपनी पहचान की तलाश में होते हैं और उन्हें आसानी से बरगलाया जा सकता है. आईएस आतंकी अपने निशाने के ऑनलाइन व्यवहार पर नजर रखते हैं. देखते हैं कि कितने अंतराल पर फेसबुक पोस्ट डाली जा रही है और इनमें भू-राजनैतिक मुद्दों पर कौन-सा रुख अख्तियार किया जा रहा है. जिसे भर्ती के लिए निशाने पर लिया गया है, उसके शौक क्या हैं.
 
बनाने लगते है रिश्तें
 
ये आईएस आतंकी समान संबंधों की मदद से ऐसे किशोरों-युवाओं से फेसबुक संवाद शुरू करते हैं. आतंकी इनसे उस वक्त हमदर्दी जताते हैं, जब वे अपनी भावनात्मक समस्या को साझा करते हैं। उन्हें उकसाते हैं, उनकी समस्याओं को जायज बताते हैं.इसके बाद आईएस के लोग ऐसे किशोरों-युवाओं को फेसबुक फ्रेंड बनाते हैं. 
 
राजनैतिक मुद्दों पर बात शुरू करते हैं और इस तरह की टिप्पणियां करते हैं कि “सरकार हमेशा मुसलमानों के मामले में अपनी नाक घुसेड़ती है.” अपनी बात को फैलाने के लिए आईएस के लोग कई फेसबुक पहचान बना लेते हैं. ये सभी अलग-अलग नामों से होते हैं और सभी में आईएस में भर्ती के लिए निशाने पर लिए गए युवाओं की शिकायतों को सही बताया जाता है.
 
IANS