नई दिल्ली. क्रिकेट दुनिया में जगमोहन डालमिया का नाम हमेशा याद किया जाएगा. उन्होंने क्रिकेट की दुनिया में भारत को आगे बढ़ाया और इसे नई चमक दी. जगमोहन डालमिया अब नहीं रहे लेकिन उनका क्रिकेट से जुड़ाव देखते ही बनता है. जानिए डालमिया का सफर
  • जगमोहन डालमिया ने अपनी कॉलेज टीम और कई क्लबों में बतौर विकेटकीपर खेलते हुए अपने क्रिकेटिंग करियर की शुरुआत की.
  • इसके बाद वह अपने पिता की कंपनी एमएल डालमिया एंड को के साथ जुड़ गए. इसे भारत की शीर्ष कंस्ट्रक्शन कंपनियों में से एक बनाया. उनकी ही कपंनी ने साल 1963 में कोलकाता की एमबी बिड़ला प्लैनेटोरियम का निर्माण किया था.
  • क्रिकेट की दुनिया में डालमिया ने 35 साल के अपने प्रशासनिक करियर की शुरुआत राजस्थान क्लब से बंगाल क्रिकेट संघ की कार्यकारी समिति का सदस्य बनकर की.
  • डालमिया 1980 के दशक में बीसीसीआई के कोषाध्यक्ष बने और उन्हें ऐसे व्यक्ति के रूप में जाना जाता है, जिन्होंने एनकेपी साल्वे को मनाया कि रिलायंस कप के फाइनल का आयोजन वानखेड़े स्टेडियम की जगह कोलकाता के ईडन गार्डन्स में कराया जाए.
  • कुशल रणनीतिकार माने जाने वाले डालमिया ने 1987 में भारत की सह-मेजबानी में रिलायंस वर्ल्ड कप और 1996 में विल्स वर्ल्ड कप के आयोजन में अहम भूमिका निभाई. इस समय उन्होंने इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया को पछाड़कर भारत, पाकिस्तान और श्रीलंका को मेजबानी दिलाई.
  • भारतीय क्रिकेट को उनका सबसे बड़ा तोहफा 1990 के दशक की शुरुआत में वर्ल्ड टेल के साथ लाखों डॉलर का टेलीविजन करार था, जिसने बीसीसीआई को दुनिया में सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड बनाने में बड़ी भूमिका निभाई.
  • 1997 में बतौर पहले एशियाई आईसीसी अध्यक्ष चुने गए डालमिया ने 10 साल बाद इसी साल मार्च में दूसरी बार बीसीसीआई के अध्यक्ष पद का कार्यभार संभाला था. 2000 में आईसीसी अध्यक्ष पद से हटने के बाद 2001 में वह बीसीसीआई के अध्यक्ष चुन लिए गए.
  • 2004 के विवादित बीसीसीआई चुनाव में डालमिया के नजदीकी रणबीर सिंह महेंद्र अध्यक्ष चुने गए, हालांकि 2005 में शरद पवार के बीसीसीआई की सर्वोच्च कुर्सी पर बैठने के बाद डालमिया को अपने विरोधियों की चाल भी झेलनी पड़ी. डालमिया को बीसीसीआई से पूरी तरह बाहर कर दिया गया, उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करवाई गई. उनके प्रिय ईडन गरडस को मैचों के आयोजन के अवसर भी कम ही दिए जाने लगे. डालमिया ने हालांकि कानूनी लड़ाई जीतने के बाद 2006 में दोबारा खेल प्रशासक के तौर वापसी की और बंगाल क्रिकेट संघ (सीएबी) के अध्यक्ष चुने गए.
(एजेंसी से इनपुट)