नई दिल्ली: टीम इंडिया के उभरते स्टार खिलाड़ी हार्दिक पांड्या आज अपना 24वां जन्मदिन मना रहे हैं. पांड्या का जन्म 1993 में गुजरात के सूरत में रहने वाले हिमांशु पंड्या के घर हुआ. पांड्या की मां का नाम मलिनी पांड्या है. हार्दिक पांड्या बहुत ही साधारण परिवार से आते हैं. पांड्या ने 2016 में वनडे और टी-20 इंटरनेशनल मैच में डेब्यू किया. जबकि उसके अगले साल 2017 में टेस्ट क्रिकेट में भी पदार्पण किया. पंड्या आज की तारीख में करोड़पति क्रिकेटर बन चुके हैं. लेकिन उनका बचपन बेहद मुश्किलों के बीच बीता. हार्दिक के पिता कार फाइनेंस का छोटा बिजनेस करते थे उसी कमाई से घर चलता था. हार्दिक जब पांच साल के थे पिता को लगातार घाटे और बीमारी के बाद बिजनेस भी बंद करना पड़ा. इसके बाद पूरा परिवार वडोदरा शिफ्ट हो गया. वो भी किराए के मकान में. इसी बीच पिता हिमांशु की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं रही.

कई बार ऐसे भी दिन आए जब हार्दिक और उनके बड़े भाई क्रुणाल को दिन में एक बार ही खाना मिल पाता था. ये बात हार्दिक पांड्या ने एक इंटरव्यू में खुद बताया था. पांड्या के पिता हिमांशु अपने दोनों बेटे हार्दिक और क्रुणाल को क्रिकेटर बनाने चाहते थे और उनकी ये चाहत पूरी भी हुई. पिता ने किसी तरह अपने दोनों बेटों को वडोदरा की पूर्व विकेटकीपर किरण मोरे क्रिकेट एकेडमी में एडमिशन  दिलाया.

 
…जब किरण मोरे ने दाखिला देने से मना कर दिया
 
पिता हिमांशु जब पांड्या को लेकर किरण मोरे के एकेडमी में पहुंचे तो पहले उन्हे एडमिशन देने से मना कर दिया. मना करने के पीछे वजह ये थी कि हार्दिक पांड्या की उम्र 12 साल से कम थी. हालांकि बाद में किरण मोरे की मदद से वे एक तेज गेंदबाज बन गए. मोरे ने हार्दिक और उनके भाई क्रुणा को अपने क्रिकेट एकेडमी में 3 साल तक फ्री कोचिंग दी. क्रिकेट एकेडमी में एडमिशन के बाद पांड्या का ध्यान पढ़ाई से हट गया. पांड्या 9वीं फेल हैं. 
 
 
आज हैं करोड़पति क्रिकेटर
 
तमाम मुश्किलों को पार करते हुए हार्दिक पांड्या आज स्टार क्रिकेटर तो हैं ही साथ में करोड़पति भी  हैं. पांड्या टीम इंडिया के अलावा आईपीएल में मुंबई इंडियन्स टीम से भी खेलते हैं. अलग-अलग कंपनियों के साथ उनकी ब्रांड एंडोर्समेंट डील है. भारतीय टीम में शामिल होने के बाद बीसीसीआई ने हार्दिक पांड्या को प्लेयर्स की ग्रेड-सी में रखा है. आईपीएल में खेलने के बदले उन्हें 1 करोड़ रुपए सलाना मिलते हैं. जबकि 50 लाख रुपए उनकी रिटेनर फीस है. 
 
पिता रहते हैं बीमार
 
हार्दिक पांड्या के पिता हिमांशु पांड्या काफी बीमार रहते हैं. पिता को 2010 में हार्ट अटैक या था. खराब होती सेहत के कारण उनके लिए नौकरी कर पाना संभव नहीं था. ऐसे में परिवार की आर्थिक स्थिति खराब हो गई. पांड्या ने इंटरव्यू में बताया है कि पिता की नौकरी जाने के बाद शुरुआती दिनों में दोनों भाई आस-पास के गांवों में जाकर पैसे कमाने के लिए क्रिकेट खेलते थे. तब हार्दिक को एक मैच खेलने के बदले 400 और उनके भाई क्रुणाल पांड्या को 500 रुपए मिलते थे. घर की स्थिति इतनी ज्यादा खराब थी कि दोनों भाइयों के पास क्रिकेट किट भी नहीं था. 
 
इरफान पठान के बल्ले से खेला मैच
 
हार्दिक पांड्या की आर्थिक स्थिति का आकलन आप ऐसे ही लगा सकते हैं कि 2014 के विजय हजारे ट्रॉफी के दौरान पांड्या के पास बल्ले नहीं थे तो उन्होंने इरफान पठान से बल्ला मांग और उन्होंने अपना बल्ला उन्हें दे दिया. अब पांड्या टीम इंडिया के स्टार ऑलराउंडर में एक रूप में अपनी पहचना बनाई है. पिच जब पांड्या होते हैं तो चौके-छक्के तो देखने को मिलते ही है. पांड्या बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फील्डिंग तीनों के लिए अच्छे खिलाड़ी माने जाते हैं.