बेंगलुरू. धुरंधर खिलाड़ियों से भरी रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर की टीम तमाम उतार-चढ़ाव के बावजूद इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के पिछले संस्करण में निराशाजनक तरीके से आठ टीमों में सातवां स्थान हासिल कर पाई. आईपीएल-7 में रॉयल चैलेंजर्स पांच मैच जीतने में सफल रहे, जबकि नौ मैचों में उन्हें हार झेलनी पड़ी.

विराट कोहली के नेतृत्व में इस बार टीम पुरानी नाकामियों को दरकिनार कर कम से कम एक प्रतिस्पर्धी टीम जरूर बनना चाहेगी और हो सका तो उनकी कोशिश अपना पहला आईपीएल खिताब जीतने की भी होगी. पिछली बार रॉयल चैलेंजर्स ने रिकॉर्ड 14 करोड़ रुपये की राशि पर युवराज सिंह को टीम के साथ जोड़ा, लेकिन बाद में उन्हें अपनी इस खरीदारी पर पछताना ही पड़ा.

युवराज पिछले संस्करण में रॉयल चैलेंजर्स के लिए 14 मैचों में 34.18 के औसत से 376 रन बना सके और गेंदबाजी करते हुए मात्र पांच विकेट चटकाए. परिणाम यह रहा कि रॉयल चैलेंजर्स ने आठवें संस्करण के लिए युवराज और छह अन्य खिलाड़ियों को टीम से बाहर करने में जरा भी देर नहीं लगाई. हालांकि युवराज लगातार दूसरी बार सर्वाधिक राशि पर खरीदे जाने वाले खिलाड़ी रहे. आठवें संस्करण के लिए दिल्ली डेयरडेविल्स ने उन्हें 16 करोड़ रुपये खर्च कर अपने साथ जोड़ा है.

रॉयल चैलेंजर्स में धुरंधर बल्लेबाजों की कमी नहीं थी, लेकिन पिछले संस्करण में वे सभी बेहद खराब फॉर्म में नजर आए. चाहे विस्फोटक कैरेबियाई बल्लेबाज क्रिस गेल हों, चाहे दक्षिण अफ्रीकी रन मशीन अब्राहम डिविलियर्स हों या भारतीय टीम के भविष्य के स्टार बल्लेबाज माने जा रहे विराट कोहली हों. गेंदबाजी में कुछ शानदार प्रदर्शन करने वाली रॉयल चैलेंजर्स के गेंदबाजों मिशेल स्टार्क, वरुण एरॉन और युजवेंद्र चहल की गेंदबाजी में भी निरंतरता का अभाव रहा.

चोट से परेशान रहे गेल पिछले संस्करण में नौ मैच खेलकर सिर्फ 196 रन बना सके, जबकि पिछले संस्करणों में वह 608, 733 और 708 रन बनाने में सफल रहे थे. रविवार को संपन्न हुए आईसीसी विश्व कप-2015 में भी गेल कुछ खास नहीं कर सके और रॉयल चैलेंजर्स के लिए यह चिंता का सबब होगा. हालांकि विश्व कप में सर्वाधिक 22 विकेट चटकाने वाले प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट रहे आस्ट्रेलियाई स्टार्क और एरॉन के चोट से उबर आने से टीम को काफी उम्मीदें बढ़ गई होंगी.

IANS