लंदन: आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल मुकाबला भारत और पाकिस्तान के बीच खेला गया. इस मुकाबले में पाकिस्तान ने भारत को 180 रनों से हराकर चैंपियंस ट्रॉफी के खिताब पर कब्जा कर लिया है. इसमें भारत के राज्य उत्तर प्रदेश मूल के एक छोरे ने पाकिस्तान की जीत में अहम भूमिका निभाई.
 
टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने आई पाकिस्तान टीम ने 50 ओवर में 4 विकेट खोकर 338 रन बनाए. जिसके जवाब में टीम इंडिया पूरे ओवर भी बल्लेबाजी नहीं कर पाई और 30.3 ओवर में 158 रनों पर ही सिमट गई. इस मुकाबले में पाकिस्तान के कप्तान सरफराज अहमद का खासा योगदान रहा.
 
टीम को संभाला
चैंपियंस ट्रॉफी में पहले मुकाबले में भारत के हाथों हार जाने के बाद पाक कप्तान सरफराज अहमद ने ही अपनी टीम को संभाला और फाइनल तक अपनी टीम को लेकर गए. फाइनल में एक बार फिर भारत से सामना था. लेकिन कप्तान सरफराज की सधी हुई रणनीति से टीम इंडिया के शेर एक-एक कर ढेर होते चले गए.
 
 
दरअसल, पाकिस्तानी कप्तान सरफराज अहमद के मामा यानी उनकी मां के भाई उत्तर प्रदेश के इटावा शहर में रहते हैं. उन्होंने बताया कि सरफराज के दादा उत्तर प्रदेश के फतेहपुर इलाके में रहते थे और जब देश का बंटवारा हुआ तो वो लोग पाकिस्तान के कराची शहर में जाकर बस गए. यानी, सरफराज अहमद की जड़ यूपी के फतेहपुर में है हालांकि अब उनके परिवार का कोई निकटतम सदस्य फतेहपुर में नहीं रहता. उनके मामा हैं जो इटावा में हैं.
 
 
2015 में बने कप्तान
22 मई, 1987 को कराची में पैदा हुआ सरफराज को लोग प्यार से सैफी बुलाते हैं. सरफराज के पिता शकील अहमद कराची के बड़े पब्लिशर थे जिनके पब्लिशिंग हाउस का नाम शकील ब्रदर्स है. 30 साल के सरफराज ने क्रिकेट में आने से पहले सरफराज ने इलेक्ट्रॉनिक्स ट्रेड में इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की. 2015 में सरफराज वनडे टीम के कप्तान भी बनाए गए.
 
महज 10 साल की उम्र में कुरान को याद कर लेने वाले सरफराज ने 2006 में भारत की अंडर-19 टीम को हराने वाली पाकिस्तानी टीम की कप्तानी की थी. इंटरनेशनल वनडे में सरफराज ने पहला मैच 2007 में भारत के खिलाफ ही खेला था. सरफराज को पाकिस्तानी टीम का ट्वेंटी-20 कप्तान 2016 में और वनडे कप्तान इसी साल फरवरी में बनाया गया.