नई दिल्ली. भारत में क्रिकेट खेल नहीं धर्म है. यहां क्रिकेटरों में आस्था रखी जाती है. खिलाड़ियों को भगवान की तरह पूजने का प्रचलन है. लेकिन आज, 15 साल बाद फिर एक फैसले ने क्रिकेट की विश्वसनीयता पर सवालिया निशान लगा दिया है. मैच फिक्सिंग का दोषी पाए जाने के बाद बीसीसीआई ने 5 दिसम्बर, 2000 को मोहम्मद अजहरुद्दीन के क्रिकेट खेलने पर आजीवन प्रतिबंध लगाया था. और आज आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग मामले में चेन्नई सुपरकिंग्स के अधिकारी और आईसीसी के चेयरमैन एन श्रीनिवासन के दामाद गुरुनाथ मयप्पन और राजस्थान रॉयल्स के सह-मालिक राज कुंद्रा को लोढ़ा समिति ने दोषी करार दिया है. मयप्पन-कुंद्रा पर आजीवन बैन लगाया गया है. वहीं चेन्नई सुपरकिंग्स और राजस्थान रॉयल्स की टीम पर भी दो साल का बैन लगाया है. अब दोनों टीमें आईपीएल और चैंपियंस लीग में हिस्सा नहीं ले पाएगी. 

भारतीय क्रिकेट इतिहास में यह दूसरी बड़ी घटना है जब मैच फिक्सिंग से जुड़ी घटना को लेकर इतनी बड़ी कार्रवाई हुई है. आईपीएल में हुई स्पॉट फिक्सिंग से खेलप्रेमियों को गहरा आघात लगा है. साथ ही, इस फैसले ने टीम इंडिया के सफलतम कप्तान माने जाने महेंद्र सिंह धोनी और बीसीसीआई में उनके संरक्षक आईसीसी के चेयरमैन एन श्रीनिवासन की छवि पर दाग लगा दिया है. धोनी-श्रीनिवासन की जोड़ी ने सट्टेबाजी के दोषी गुरुनाथ मयप्पन को बचाने का भरसक प्रयास किया. धोनी ने पिछले साल स्पॉट फिक्सिंग की जांच कर रहे जस्टिस मुद्गल समिति से कहा था कि गुरूनाथ मयप्पन केवल एक क्रिकेट प्रशंसक हैं और चेन्नई सुपर किंग्स टीम का समर्थन करते हैं. धोनी ने इस बात की पुष्टि की थी कि मयप्पन सीएसके के अधिकारी नहीं हैं और महज एक प्रशंसक ही हैं. 

धोनी के अलावा समिति के सामने प्रस्तुत हुए इंडिया सीमेंट्स के अधिकारियों ने भी बताया कि मयप्पन का इंडिया सीमेंट्स में कोई शेयर नहीं है और इसलिए उन्हें सीएसके का मालिक भी नहीं समझा जा सकता है. लेकिन, लोढ़ा समिति ने धोनी-श्रीनिवासन की बात को नकारते हुए मयप्पन को सीएसके का अधिकारी माना है और चेन्नई टीम पर दो साल के लिए बैन लगा दिया है. अब धोनी पर सवाल उठ रहा है कि क्या उन्होंने श्रीनिवासन के दबाव में उनके दामाद मयप्पन को बचाने की कोशिश की या उन्हें सचमुच इस बात का पता नहीं था कि मयप्पन टीम के अधिकारी हैं. हालांकि मयप्पन हर मैच में खिलाड़ियों के साथ मैदान के बाहर डगआउट में नजर आते थे. और आईपीएल में खिलाड़ियों के साथ बैठने की इजाजत सिर्फ टीम के मालिक और स्टॉफ को है. 

बीजेपी सांसद और पूर्व क्रिकेटर कीर्ति आजाद ने लोढ़ा समिति के फैसले पर कहा है कि समिति ने सिर्फ पहाड़ में से राई निकाला है. अब समय आ गया है कि बड़ी मछलियों पर कार्रवाई की जाए. आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा आईपीएल-6 में फिक्सिंग मामले की जांच के लिए बनी जस्टिस मुकुल मुदगल कमिटी ने भी अपनी रिपोर्ट में फिक्सिंग के आरोपों पर मुहर लगाई थी. इतना ही नहीं समिति ने तो इस पूरे मामले में विदेशी खिलाड़ियों और भारतीय टीम के लिए खेल चुके 13 खिलाड़ियों की भूमिका की भी जांच की बात कही थी. जांच समिति ने इन खिलाड़ियों के नाम शीर्ष अदालत को सीलबंद लिफाफे में सौंपे थे. अब समय आ गया है कि सुप्रीम कोर्ट को उन खिलाड़ियों का नाम जाहिर कर देना चाहिए. जो बेदाग हैं उन्हें अपना सच साबित करने का मौका देना चाहिए.

आईपीएल में हुए काले खेल का मामला आईपीएल सीज़न-6 से जुड़ा हुआ है, जब दिल्ली पुलिस ने मुंबई से पूर्व टेस्ट क्रिकेटर एस. श्रीसंत सहित राजस्थान रॉयल्स के 3 खिलाड़ियों को गिरफ्तार किया. पुलिस के मुताबिक, 2013 में मुंबई में राजस्थान रॉयल्स बनाम मुंबई इंडियंस, पांच मई को जयपुर में हुए राजस्थान रॉयल्स बनाम पुणे वॉरियर्स और नौ मई को मोहाली में हुए राजस्थान रॉयल्स बनाम किंग्स इलेवन पंजाब के बीच मैचों में स्पॉट फिक्सिंग हुई थी. उस वक्त इस मामले में तीन खिलाड़ियों और 11 सटोरियों को गिरफ़्तार किया गया था. धीरे-धीरे इस मामले में देश में क्रिकेट को चलाने वाले लोग भी जुड़ने लगे, जब पूर्व बीसीसीआई अध्यक्ष एन श्रीनिवासन के दामाद गुरुनाथ मयप्पन की गिरफ्तारी हुई. बाद में इस मामले में दिल्ली पुलिस की चार्जशीट में कुल 42 लोग आरोपी बने, जिनमें से 6 फरार हैं.

मजेदार बात है कि जांच के दौरान तमिलनाडु पुलिस को एक टेप मिला था. इसमें आईपीएल में सट्टेबाजी के दोषी मयप्पन और बिंदू दारा सिंह के बीच 12 मई, 2013 को चेन्नै सुपरकिंग्स और राजस्थान रॉयल्स के बीच हुए मैच पर बात हो रही है. टेप में मयप्पन बिंदू से बोलता है कि चेन्नै इस मैच में करीब 140 रन बनाएगी, जबकि धोनी की टीम ने इस मैच में 141 बन बनाए थे. मैच के दौरान मयप्पन ने चेन्नै के खिलाफ 14 करोड़ का सट्टा लगाया था और बिंदू को बहुत विश्वास के साथ कहा था कि राजस्थान यह मैच जीतेगा. इस मैच में रैना ने 1 रन और खुद कप्तान धोनी ने 2 रन बनाया था. दोनों बल्लेबाज एक ही ओवर में केविन कूपर के गेंद पर आउट हुए थे. इसी मैच में एक समय राजस्थान 45 रन पर 4 विकेट खोकर संघर्ष कर रहा था लेकिन वाटसन 34 गेंदों पर 70 रन ठोंककर राजस्थान को 17 ओवर में जीत दिला दी.

तमिलनाडु के पूर्व एसपी (आतंरिक सुरक्षा) जी संपत कुमार, जिन्होंने स्पॉट फिक्सिंग में धोनी के नाम का खुलासा किया था. उन्होंने भी एक टीवी न्यूज चैनल को बताया था कि बुकी के कहने पर मयप्पन ने धोनी व रैना से संपर्क किया था. उन्होंने कहा, विक्रम अग्रवाल और मयप्पन के बीच मीटिंग हुई थी. विक्रम ने मयप्पन को चेन्नई के कुछ खिलाडिय़ों से बात करने के लिए कहा था जिसके बाद मयप्पन ने एक पार्टी में धोनी और रैना से बात की थी. कुमार ने इस पूरे मामले की जांच एनआईए से कराए जाने की भी मांग की थी.

इतने आरोपों के बावजूद तत्कालीन बीसीसीआई अध्यक्ष एन श्रीनिवासन ने कुछ नहीं किया. हालांकि जस्टिस मुकुल मुदगल कमिटी ने श्रीनिवासन पर फिक्सिंग या सट्टेबाजी के आरोप नहीं लगाए, लेकिन उन्हें सबकुछ जानते हुए कोई कार्रवाई नहीं करने का दोषी पाया. आपको बता दें कि 2 जून 2013 को बीसीसीआई की बैठक में चेन्नई-राजस्थान फ्रेंचाइज़ी की जांच के लिए दो रिटायर्ड जजों की समिति बनाई गई थी. मात्र 56 दिनों के बाद 28 जुलाई 2013 को बीसीसीआई की बनाई जजों की समिति ने राजस्थान रॉयल्स और चेन्नई सुपर किंग्स को क्लीन चिट दे दी. इस दौरान श्रीनिवासन खुद के साथ अपने दामाद और टीम इंडिया के कैप्टन धोनी को बचाते चले गए. अब ये सवाल बीसीसीआई में शामिल पदाधिकारियों से भी पूछा जाना कि उन्होंने पिछले दो साल से श्रीनिवासन के खिलाफ क्या कदम उठाया ? क्या इतना होने के बावजूद श्रीनिवासन को आईसीसी का चेयरमैन बने रहना चाहिए ?

खैर अब फैसला आ चुका है और दो टीमों पर बैन भी लगाया जा चुका है. अब दोनों टीमों की ओर से खेलने वाले दर्जनों खिलाड़ी के भविष्य पर बीसीसीआई को चिंता करनी चाहिए. जस्टिस लोढ़ा ने कहा है कि यह फैसला बीसीसीआई को लेना है कि चेन्नई सुपरकिंग्स और राजस्थान रॉयल्स का कोई और फ्रेंचाइज़ी खरीदे या नहीं. बोर्ड के पास तीन रास्ते हैं. पहला वह नई टीमों के बोली आमंत्रित कर सकती है.  हाल में खबर आई थी कि उद्योगपति नवीन जिंदल आरसीबी टीम को खरीदने के लिए इच्छुक हैं, इसीलिए नए मालिक तो आसानी से मिल जाएंगे. दूसरा आईपीएल अगले दो सालों के लिए मात्र 6 टीमों के बीच खेली जाए, लेकिन यह बीसीसीआई और टीम मालिकों के लिए घाटे का सौदा है. तीसरा यह है कि कोच्चि और पुणे को वापस बुलाया जाए और चेन्नई-रॉयल्स के खिलाड़ियों को नीलामी में रखा जाए. इस मसले पर आईपीएल ने अपनी गवर्निंग काउंसिल की आपात बैठक 19 जुलाई को बुलाई है. वहीं बीसीसीआई चीफ जगमोहन डालमिया ने कहा है कि बोर्ड अदालती फैसलों का सम्मान करेगा.

जिन लोगों का विश्वास 15 साल पहले अजहर वाली मैच फिक्सिंग घटना के बाद क्रिकेट से नहीं उठा होगा उनका भरोसा तो आज के इस फैसले से टूट ही गया होगा. खिलाड़ियों और टीम मालिकों को यह समझना चाहिए कि उनकी वैल्यू सिर्फ खेल की वजह से है. अगर वो सट्टेबाजी या मैच फिक्सिंग में शामिल होते हैं तो उनके साथ क्रिकेट के भी भविष्य पर अंधेरा छा जाएगा. हालांकि, सिर्फ कुछ व्यक्तियों की करतूतों और दो टीमों के निलंबन से क्रिकेट के सुनहरे भविष्य पर कोई असर नहीं पड़ेगा. लोढ़ा समिति के फैसले से एक ताजा हवा तो आई है, लेकिन यह तो शुरूआत है अभी बहुत कुछ आना शेष है. खेलप्रेमियों को ये बात याद रखनी चाहिए कि 15 साल पहले मैच फिक्सिंग का खुलासा होने के बाद भारतीय टीम को सौरभ गांगुली जैसा कप्तान मिला. इसीलिए व्यक्ति या मालिक महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि सिर्फ और सिर्फ क्रिकेट जरूरी है.