रियो डी जेनेरियो. साक्षी मलिक, गुरुवार के पहले कोई इस नाम को नहीं जानता था. लेकिन गुरुवार को 23 साल की इस लड़की ने वो कर दिखाया जिसका हर भारतीय को इंतजार था. रियो ओलंपिक में मेडल जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी तो ये बनी ही, कुश्ती में मेडल लाने वाली भी पहली महिला पहलवान बन गईं. इतिहास के पन्नों में अपना नाम शानदार तरीके से दर्ज करा लिया.
 
इनख़बर से जुड़ें | एंड्रॉएड ऐप्प | फेसबुक | ट्विटर
 
58 किलोग्राम फ्रीस्टाइल कुश्ती में ब्रॉन्ज मेडल पर कब्जा कर लिया. रेपशाज मुकाबले में साक्षी ने किर्गिस्तान के एसुनु तिनिवेकोवा को 8-5 से हराया. जीत के बाद साक्षी ने कहा कि ये जीत उनकी 12 साल की तपस्या का फल है.
 
क्वॉर्टर फाइनल में रुसी पहलवान वेलेरियो कोबोलोवा से हारने के बाद साक्षी हताश हो गयी थीं. तब उनके कोच ने उन्हें समझाया कि मेडल जीतने की उनकी आस अभी भी बाकी है. क्वार्टर फाइनल और रेपशाज मुकाबले के बीच 2 घंटे का समय था. इस वक्त में साक्षी ने खुद को संभाला और पूरी ताकत के साथ मुकाबले में उतरीं. 
 
क्या है रेपशाज मुकाबला 
इसमें जिस पहलवान से आप हारे हैं अगर वो पहलवान फाइनल में पहुंच जाता है तो आपको उन सभी पहलवानों को हराना होगा जिन्हें हराकर वह फाइनल में पहुंचा है.