नई दिल्ली. सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणियों के साथ बीसीसीआइ में ढांचागत सुधारों पर लोढा कमेटी की सिफारिशों पर अपनी मुहर लगा दी. कोर्ट ने लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों के खिलाफ बीसीसआई की ज्यादातर आपत्तियां खारिज कर दीं.
 
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राजनीति का अड्डा बन चुकी बीसीसआई में मंत्रियों और सरकारी अधिकारियों के प्रवेश को प्रतिबंधित करते हुए कोर्ट ने कहा कि इन लोगों को बीसीसआई पदाधिकारी बनने के लिए अयोग्य ठहराए जाने की कमेटी की सिफारिश बिल्कुल सही है.
 
कोर्ट ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि इस देश में खेल तभी फलफूल सकता है क्योंकि मंत्री या सरकारी अधिकारी बीसीसआई या राज्य एसोसिएशन में पदाधिकारी है. बीसीसआई की इस दलील में कतई दम नहीं है कि इन्हें बना रहने दिया जाए नहीं तो ये लोग खेल की प्रोन्नति में जो मदद देनी चाहिए देने से इन्कार कर देंगे.
 
कोर्ट ने कहा कि देश में ऐसे बहुत से मंत्री और नौकरशाह हैं, जो खेल के लिए दीवानगी रखते हैं और उनसे कानूनी रूप से उनकी सीमा के भीतर जो बन पड़ेगा वे खेल के उत्थान के लिए करेंगे. 
 
कोर्ट ने साफ कर दिया कि एक राज्य एक वोट होगा. मंत्री और सरकारी अधिकारी बीसीसआई के पदाधिकारी नहीं हो सकते. अनिश्चित काल तक कोई पदाधिकारी नहीं रह सकता और पदाधिकारी बनने की अधिकतम आयु सीमा 70 वर्ष होगी. कोर्ट ने लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों के खिलाफ बीसीसआई के अडिय़ल रुख और आपत्तियों को खारिज करते हुए परिवर्तन बनाए रखने और परिवर्तन स्वीकार करने की सीख दी है. 
 
एक राज्य एक वोट के नियम को भी स्वीकार किया गया है हालांकि कोर्ट ने चार चार क्षत्रीय एसोसिएशन वाले महाराष्ट्र और गुजरात को रोटेशन के आधार पर मतदान की अनुमति दी है. लेकिन वहां भी एक बार में राज्य की ओर से एक ही वोट होगा. इसके अलावा क्लब व एसोसिएशनों की फुल मेंम्बर शिप के बजाए एसोसिएट मेम्बरशिप होगी. इनमें पांच क्लब आते हैं. रेलवे स्पोर्टस प्रमोशन बोर्ड, एसोसिएशन आफ इंडियन यूनीवर्सिटीज, सर्विस स्पोर्टस कंट्रोल बोर्ड, नेशनल क्रिकेट क्लब और क्रिकेट क्लब आफ इंडिया शामिल है.
 
कोर्ट ने बीसीसीआई को आरटीआइ के दायरे में लाने के मुद्दे पर विधि आयोग के विचार करने की बात कही है. कोर्ट ने कहा कि विधि आयोग इस पर विचार कर अपने सुझाव सरकार को दे सकता है. इसके साथ ही सïट्टेबाजी को कानूनी करने की लोढ़ा कमेटी की सिफारिश पर भी कोर्ट ने कहा है कि इस पर विधि आयोग और सरकार को विचार करना चाहिये और उन्हें जो ठीक लगे वे करें.
 
कोर्ट ने आदेश और सिफारिशें लागू करने और उनकी निगरानी का काम लोढ़ा कमेटी को सौंपा है. कोर्ट ने कहा कि उनका मानना है कि ये सिफारिशें और आदेश चार महीने में लागू हो जाने चाहिए या फिर अधिकतम छह महीने में. लेकिन फिर भी इसे लागू करने की समयसीमा तय करने का काम कोर्ट ने लोढ़ा कमेटी पर छोड़ दिया है.
 
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कोर्ट ने मैच का आनंद लेने के दर्शकों के अधिकार और उन्हें अबाधित खेल दिखाए जाने की पैरवी तो की है लेकिन बीसीसीआइ के प्रसारण अधिकार के बारे में पहले से चल रहे करारों को देखते हुए कोर्ट ने प्रसारण के बारे में निर्णय लेने का अधिकार बीसीसीआइ पर ही छोड़ दिया है लेकिन साफ किया है कि बीसीसीआइ ये सुनिश्चित करेगी कि दर्शकों को अबाधित खेल देखने को मिले.