नई दिल्ली. हॉकी वर्ल्ड लीग के फाइनल में भारत ने रोमांचक मुकाबले में नीदरलैंड को पेनल्टी शूटआउट में 3-2 से हरा दिया है. इसी के साथ भारत ने 1982 के बाद पहली बार अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में कोई पदक जीता है.

भारत ने अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में 33 साल से कोई पदक नहीं जीता था. इस जीत के बाद भारत ने पदक जीतने का सूखा भी खत्म कर दिया है.

इससे पहले भारत ने किसी अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में आखिरी बार 1982 में एम्सटर्डम में चैंपियन्स ट्राफी में पाकिस्तान को 5-4 से हराकर कांस्य पदक जीता था.

भारत और नीदरलैंड कांस्य पदक के इस रोमांचक मुकाबले में अंतराल तक 5-5 से बराबरी पर थे. जिसके बाद पेनल्टी शूटआउट का सहारा लिया जिसमें भारत ने 3-2 से बाजी मारी. इससे पहले नीदरलैंड ने भारतीय टीम को लीग चरण में 1-3 से हराया था.

नीदरलैंड ने मैच शुरू होने के बाद पहले दो क्वार्टर में 2-0 की बढ़त बना ली. उसकी तरफ से ये गोल प्रूइसर और निक वान डर स्कूट ने किए. इस रोमांचक मुकाबले में आखिरी दस मिनट में कम से कम छह गोल दागे गए. इमनें से भारत और नीदरलैंड दोनों की तरफ से तीन-तीन गोल किये गए थे.

भारत के रमनदीप सिंह ने 39वें मिनट में मैदानी गोल दागा जबकि रूपिंदर पाल सिंह ने 47वें मिनट में पेनल्टी कार्नर को गोल में बदलकर स्कोर 2-2 से बराबर किया. आखिरी छह मिनट के खेल में पांच गोल हुए.

नीदरलैंड के वान डर वीर्डन ने अपनी टीम को बराबरी दिलाई. उन्होंने पेनल्टी कार्नर पर यह गोल किया लेकिन अगले मिनट में ही रूपिंदर ने दिन का दूसरा गोल दागा जब उन्होंने पेनल्टी स्ट्रोक को गोल में तब्दील किया.

भारत के लिए अगले मिनट में आकाशदीप सिंह ने गोल करके टीम को 5-3 से आगे कर दिया.  नीदरलैंड की टीम ने हालांकि हार नहीं मानी और आखिरी दो मिनट में दो गोल करके मैच को शूटआउट तक खींच दिया. उसकी तरफ से ये दोनों गोल वान डर वीर्डन ने किये. इस तरह से उन्होंने मैच की हैट्रिक भी पूरी की.