नई दिल्ली: हिंदुस्तान की सबसे ताकतवर पनडुब्बी में इंडिया न्यूज की स्पेशल कवरेज. आज सिंधुघोष की पूरी कहानी बताने जा रहे है. साल 1986 में नौसेना में शामिल हुई थी सिंधुघोष. आईएनएस सिंधुघोष की रूस ने बनाया है. सतह पर इसका वजन 2325 टन होता है. पानी के अंदर इसका वजन 3076 टन होता है.
 
सिंधुघोष में लगभग 100 नौसैनिक सफर कर सकते हैं. समंदर में हिंदुस्तान का सबसे बड़ा हथियार. आईएनएस सिंधुघोष में 6 कम्पार्टमेंट होते हैं. इसमें एक बार में 18 टॉरपीडो और मिसाइलें रखी जा सकती है. ये समंदर में 1000 फीट नीचे तक जा सकती है. भारतीय नौसेना की पनडु्ब्बी INS सिंधुघोष बृहस्पतिवार देर रात मुंबई के दक्षिणी तट पर हादसे का शिकार हो गई है
 
बता दें कि कुछ दिन पहले पनडुब्बी मछली पकड़ने वाली नाव से उस दौरान टकरा गई, जब यह पानी के अंदर से ऊपर की ओर आ रही थी. इस हादसे के दौरान पनडुब्बी का पेरीस्कोप क्षतिग्रस्त हो गया. फिलहाल ये पनडु्ब्बी वापस मुबंई हार्बर पर वापस आ गई है और इसकी मरम्मत की जा रही है.
 
नौसेना के मुताबिक इस हादसे में पनडुब्बी को कोई बहुत ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है. नौसेना के प्रवक्ता कैप्टन डीके शर्मा के मुताबिक ये हादसा ट्रोपेक्स अभ्यास के दौरान हुआ. ये युद्ध अभ्यास घुप्प अंधेरी रात में हो रहा था और ऐसी घटनाओं की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता. इस बारे में नौसेना हेडक्वार्टर ने संबधित अधिकारियों को जानकारी दे दी गई है.
 
गौरतलब है कि इससे पहले भी पिछले साल सिंधुघोष हादसे का शिकार होते-होते बची थी. नौसेना के दूसरे पनडुब्बी INS सिंधुरत्न में पिछले साल हुए हादसे में जहरीली गैस फैलने की वजह से दो नौसैनिकों की मौत हो गई थी. वहीं 2013 में हुए एक भयानक हादसे में INS सिंधुरक्षक में तीन अधिकारी सहित 15 नौसैनिकों की मौत हो गई थी.
 
वैसे भी नौसेना में अब गिनती के ही पनडु्ब्बी बचे हैं. हाल के सालों में नौसेना अपने हादसों को लेकर चर्चा में रही है और यहां तक की पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल डीके जोशी को इन हादसों की वजह से इस्तीफा देना पड़ा था.