डिंडोरी: आजादी के सत्तर साल बाद भी मध्य प्रदेश के डिंडोरी जिले के मेंहदवानी गांव में बच्चों को स्कूल जाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है. वो भी ऐसी नाव जो खुद नाव जैसी नहीं दिखती. कोई सहारा नहीं है कि नाव कब हादसे का शिकार हो जाए. बारिश और उफनती नदी में.
 
एक नाव में 6-7 बच्चे बैठते हैं और नदी क्रॉस कर स्कूल पहुंचते हैं. आज के समय में हैरानी की बात है कि इस इलाके में सड़कें नहीं बनी है. आठवीं क्लास के बाद यहां के बच्चे पहाड़ी पगडंडियों पर चलकर नदी पार करके मंडला जिले के कापा हाईस्कूल जाते हैं. पिछले साल की इस तस्वीर को देख कर आपका शरीर कांप उठेगा.
 
 
नीचे उफनती हुई मंदाकिनी नदी और ऊपर ट्रॉली पर बैठे पांच पुलिसवाले. ड्यूटी करनी है तो जान हथेली पर लेकर उफनती नदी को पार रहे हैं. उसी मंदाकिनी नदी में पीले रंग की एक ट्रॉली में चार छात्राएं फंसी थीं और दूसरी ट्रॉली में चार टीचर. आठ लोगों की जान मुसीबत में पड़ी थी. प्रशासन के खबर के बाद पुलिस और पीडब्ल्यू कर्मचारियों ने इनका रेस्क्यू किया. बताया जाता है कि यहां भी चार साल बीत गए लेकिन आज तक झूलापुल नहीं बनाया गया. 
 
झूठे वादे और दिलासा के बीच हर रोज़ इसी तरह छात्रों को अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ती है. इसके बाद भी आज न तो सरकार का ध्यान इस पर गया और ना ही प्रशासन का. बच्चे हर रोज जान जोखिम में डालकर स्कूल जाते-आते हैं. बारिश में स्थिति ऐसी हो जाती है कि नाव कब पानी में पलट जाएगी कोई नहीं जानता. 
 
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