नई दिल्ली: निधिवन और रंगमहल. श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा और वृंदावन जो भी गया होगा. उसने इन दोनों के रहस्य के बारे में तमाम कहानियां सुनी होंगी. कहते हैं यहां आज भी रात के वक्त भगवान श्रीकृष्ण आते हैं और निधिवन के इस वीराने से लेकर रंगमहल की रौनक में अपनी मौजूदगी का अहसास छोड़ जाते हैं.
 
कहते हैं कि रात के वक्त निधिवन में ना कोई रुक सकता है और ना ही किसी को इस निधिवन को रात में देखने की इजाज़त है. इसी वजह से रात में यहां से हर किसी को बाहर कर दिया जाता है और निधिवन के मुख्य द्वार पर ताला लगा दिया जाता है. दिन ढलने से पहले हमने खुद देखा कि इस निधिवन के आसपास बने घरों की खिड़कियां खुली थीं लेकिन रात में 8 बजे के बाद वो तमाम खिड़कियां बंद हो गईं.
 
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निधिवन के आसपास रहने वाले लोगों को आज भी लगता है कि भगवान श्रीकृष्ण और गोपियों की रासलीला को अपनी आंखों से देखने की कोशिश भी नहीं करना चाहिए क्योंकि जिसने भी कभी ऐसी कोशिश की या तो वो अंधा हो गया या पागल. नहीं तो वो किसी आपदा का शिकार हो गया.
 
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रंगमहल के बारे में कहते हैं कि रात में वहां दातून, मिठाई, श्रंगार के सामान और जो इसके साथ जो कुछ भी रखा जाता है. वो सुबह ऐसी हालत में मिलता है. जैसे किसी ने उसका इस्तेमाल किया हो लेकिन निधिवन में क्या रात में वाकई कोई आवाज़ सुनाई देती है. हम और हमारा कैमरा ये सच जानने की पूरी कोशिश कर रहे थे.
 
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निधिवन श्रीकृष्ण की नगरी वृंदावन में है. निधिवन के बारे में कई कहानियां प्रचलित हैं. मान्यता है कि यहां गोपियों संग रास रचाते हैं कन्हैया रात के वक्त यहां किसी को रुकने नहीं दिया जाता. निधिवन में तुलसी के छोटे-छोटे पेड़ हैं. कहते हैं रात के वक्त ये पेड़ गोपियां बन जाते हैं. श्रीकृष्ण के साथ रात में गोपियां रास रचाती हैं. ‘रंगमहल’ में रोज़ रात में सेज सजती है. कहते हैं कि कृष्ण और राधा यहां रोज़ आते हैं.
 
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