नई दिल्ली : जरा सोचिए 21वीं सदी में कोई कैसे बिजली के बिना रह सकता है. लेकिन ये सच्चाई है मोदी के हिंदुस्तान की. ये सच्चाई है योगी के यूपी की. यहां सांझ ढलते ही बच्चे लालटेन में पढ़ाई करते हैं और महिलाएं ढिबरी की रोशनी में खाना पकाती हैं.
 
हिंदुस्तान के इस गांव ने कभी बिजली नहीं देखी. इस गांव में कभी ‘विकास की चिड़िया’ नहीं उड़ी. गांववालों ने कभी बल्ब की रोशनी नहीं देखी. आज़ादी के 70 साल बाद भी यहां ‘लालटेन युग’ है. यहां लालेटन में पढ़ाई लिखाई होती है. इस गांव की आबादी अंधेरे में डूबी है. ये है उत्तर प्रदेश का अंधेर गांव.
 
पावर फॉर ऑल
यूपी के सीएम का संकल्प है ‘पावर फॉर ऑल’ यानी सबको बिजली. शहरों को 24 घंटे बिजली और गांवों को 18 घंटे देना. लेकिन योगी के प्रदेश के इस गांव ने तो आज तक बिजली नहीं देखी. यहां के बच्चों ने कभी टेलीविजन नहीं देखा. यूपी के इस गांव में बिजली के बिना बेटों की शादी नहीं होती. बेटियों का ब्याह रुक जाता है. बच्चों की पढ़ाई लिखाई बीच में छूट जाती है.
 
साजेरा गांव में लगभग हर घर में रात का खाना सांझ ढलने से पहले बन जाता है. अगर फिर भी किसी महिला को खाना बनाना हो तो ढिबरी जलाकर लकड़ी के चूल्हे पर रोटी सेंकी जाती है. यहां मायके से ससुराल तक वृद्ध महिलाओं ने कभी बिजली नहीं देखी. सीएम योगी कहते हैं कि उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बना देंगे. तो क्या योगीराज में साजेरा गांव बल्ब की रोशनी में जगमगा उठेगा ? 
 
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