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उम्मीदों की रोशनीः जर्जर क्यों हो गई बिजली की 'जीवनरेखा'

उम्मीदों की रोशनीः जर्जर क्यों हो गई बिजली की 'जीवनरेखा'

By Web Desk | Updated: Wednesday, October 19, 2016 - 22:21

India news special coverage umeedo ki roshni part 11

नई दिल्ली. देश में बिजली संकट का इलाज़ होना नामुमकिन तो नहीं, लेकिन मुश्किल ज़रूर है. वजह ये है कि देश में बिजली की जीवनरेखा यानी ट्रांसमिशन लाइन जर्जर और खस्ताहाल है.
 
इंडिया न्यूज़-IPPAI की पड़ताल
देश में बिजली की दशा और दिशा की पड़ताल करने के लिए इंडिया न्यूज़ ने इंडिपेंडेंस पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (IPPAI) के साथ 'उम्मीदों की रोशनी' के नाम से सीरीज़ शुरू की है. IPPAI देश में ऊर्जा क्षेत्र की पहली थिंकटैंक है, जो 1994 से भारत में ऊर्जा क्षेत्र की सच्चाई पर खुली बहस के लिए निष्पक्ष मंच के रूप में काम कर रही है.
 
ट्रांसमिशन खराब तो सप्लाई कैसे हो दुरुस्त ?
सितंबर के तीसरे हफ्ते में गोवा में IPPAI की रेगुलेटर्स एंड पॉलिसीमेकर्स रिट्रीट में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कबूल किया कि देश में बिजली सप्लाई की हालत ठीक नहीं है, क्योंकि ट्रांसमिशन नेटवर्क दुरुस्त नहीं है. ऊर्जा विशेषज्ञों का भी कहना है कि ट्रांसमिशन नेटवर्क का राज्यों में विस्तार पर्याप्त नहीं हुआ और जो ट्रांसमिशन लाइनें राज्यों की पावर ट्रांसमिशन कंपनियों के पास हैं, उनकी देख-रेख की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, जिसका बुरा असर बिजली कंपनियों की आर्थिक सेहत और सप्लाई की गुणवत्ता पर पड़ रहा है.
 
ट्रांसमिशन नेटवर्क में निवेश की ज़रूरत
देश में राष्ट्रीय स्तर पर ट्रांसमिशन नेटवर्क बनाने की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की कंपनी पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड की है. जानकारों का कहना है कि पावर ग्रिड का कामकाज ठीक चल रहा है. ऊर्जा मंत्रालय के मुताबिक, 31 अगस्त 2016 तक देश में पावर ट्रांसमिशन नेटवर्क 3 लाख 50 हज़ार 792 सर्किट किलोमीटर था.
 
ये ट्रांसमिशन नेटवर्क 220 केवीए या उससे अधिक क्षमता के हैं. वित्त वर्ष 2016-17 में केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने ट्रांसमिशन नेटवर्क का विस्तार 23 हज़ार 384 किलोमीटर बढ़ाने का टारगेट तय किया है, जिसमें से 31 अगस्त 2016 तक 39.5 फीसदी यानी 9241 सर्किट किलोमीटर ट्रांसमिशन लाइन का काम पूरा हो चुका था. लेकिन राज्यों की ट्रांसमिशन कंपनियों की रफ्तार सुस्त है.
 
उनके पास ट्रांसमिशन लाइन के लिए पूंजी की कमी है और प्राइवेट कंपनियों को ट्रांसमिशन सेक्टर में काम करने में दिक्कत आ रही है, क्योंकि प्रोजेक्ट की मंजूरी से लेकर ट्रांसमिशन लाइसेंस लेने की प्रक्रिया बहुत लंबी है.
 
 
First Published | Wednesday, October 19, 2016 - 22:08
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Web Title: India news special coverage umeedo ki roshni part 11
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