नई दिल्ली. श्रावण माह में भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना का दौर जारी रहता है. सभी शिव मंदिरों में श्रावण मास के दौरान ‘बम-बम भोले और ॐ नम: शिवाय’ की गूंज सुनाई देगी. शिवालयों में श्रद्धालुओं की खासी भीड़ उमड़ने लगी है. धार्मिक पुराणों के अनुसार श्रावण मास में शिवजी को एक बिल्वपत्र चढ़ाने से तीन जन्मों के पापों का नाश होता है. महादेव को श्रावण मास सबसे प्रिय महीना लगता है. क्योंकि श्रावण मास में सबसे अधिक वर्षा होने के आसार रहते है, जो शिव के गर्म शरीर को ठंडक प्रदान करती और हमारी कृषि के लिए भी अत्यन्त लाभकारी है. क्या आप जानते हैं भगवान शिव हाथ में डमरू क्यों रखते हैं, उनके तीन नेत्र क्यों हैं और उन्होंने गले में सर्पो का हार क्यों धारण किया है? ऐसे ही भगवान शिव के 14 रहस्य आज हम आपको बताएंगे.
 
जानिए भगवान शिव से जुड़े ऎसे ही कुछ रहस्य 
सर्पों का हार
भगवान शिव गले में सर्पो का हार धारण करते हैं. सामान्यत: देवगण पुष्पों का हार पहनते हैं लेकिन शिव उनसे न्यारे हैं. सर्प धारण करने का अर्थ है जिन्हें संसार पसंद नहीं करता, भगवान शिव उसे भी गले से लगाते हैं. उनके मन में हर जीव के लिए प्रेम है. फिर चाहे वह सर्प ही क्यों न हो.
 
डमरू
शिव जितने महान योगी हैं, उतने ही संगीत के भी ज्ञाता हैं. शिव के डमरू से निकली ध्वनि के माध्यम से ही संस्कृत के व्याकरण की रचना हुई है. संस्कृत सभी भाषाओं की जननी और ज्ञान-विज्ञान का आधार है. इस प्रकार शिव के डमरू से ही विज्ञान, तकनीकी, चिकित्सा विज्ञान, सभ्यता और संस्कृति का उदय हुआ है.
 
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