नई दिल्ली. भारत में करीब 400 करोड़ के जाली नोट मौजूद हैं, वहीं हर साल 70 करोड़ रुपये के जाली नोट भारतीय बाजार में उतारे जा रहे हैं. देश में हर 1 लाख नोटों में 250 जाली हैं. भारत में आने वाले जाली नोटों की छपाई पाकिस्तान में होती है. जाली भारतीय नोट और पाकिस्तानी करेंसी की डेंसिटी एक ही जैसी है, इसलिए लोगों को चकमा देने में इस धंधे में शामिल लोग कामयाब हो जाते हैं.
 
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रिपोर्ट के मुताबिक इस धंधे में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई भी शामिल है. सबसे ज्यादा नकली नोटों की खेप भारत में बंगाल के मालदा के रास्ते आती है. इसमें भी सबसे ज्यादा जाली नोट 500 और 1000 के हैं. बढ़ते खतरे को देखते हुए इस धंधे पर लगाम लगाने की जिम्मेवारी राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को दी गई है.
 
पाकिस्तान में 1000 के भारतीय जाली नोट बनाने में सिर्फ 39 रुपये का खर्च आता है. पाकिस्तान भी उसी कंपनी से कागज और स्याही खरीद रहा है जहां से भारतीय रिजर्व बैंक खरीदती है. 1000 का जाली भारतीय नोट आईएसआई एजेंट को 300 रुपये में बेचा जाता है. संसद में सरकार भी मान चुकी है कि जाली नोटों से भारतीय अर्थव्यवस्था को बर्बाद की साजिश रची जा रही है. जाली नोटों के धंधे को देखते हुए रिजर्व बैंक ने 2005 से पहले छापे गए नोटों को बंद करने का फैसला भी किया था.
 
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रिपोर्ट के मुताबिक इस काले धंधे में दाऊद इब्राहीम भी शामिल है. उसके गुर्गे भारत में जाली नोट छपवाने का काम संभालते हैं. बांग्लादेश, नेपाल बॉर्डर के रास्ते भारत में इन जाली नोटों को लाया जाता है. पूर्व सीबीआई डायरेक्टर जोगिंद्र सिंह ने बताया कि अभी तक जितने आरोपी पकड़े गए हैं उनके बयानों के मुताबिक जाली नोटों की छपाई कराची सहित पाकिस्तान के कई शहरों में होती है. इंडिया न्यूज के Exclusive रिपोर्ट में देखिए कैसे भारत में जाली नोट का बाजार अपना पांव पसार रहा है?