नई दिल्ली. आज बात एक ऐसे खलनायक की जिसने जुर्म की दुनिया के उसूलों को तोड़ दिया. उसने दरिंदगी की नई दास्तानें लिखीं हैं. सिर्फ अपने दुश्मनों को ही नहीं उसने पुलिसवालों को भी मौत के घाट उतारा, लेकिन फिर भी वो ज़िंदा है. ना सिर्फ ज़िंदा है बल्कि उसकी दरिंदगी और दहशत दोनों कायम हैं
 
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इस खलनायक का चेहरा देश में किसी पहचान का मोहताज नहीं है. क्योंकि ये वो है जिसने उत्तर भारत में गुनाह की ऐसी दास्तान लिखी है जिसे सुनकर नस्लें कांप जाती हैं. औरते चीख पड़ती हैं, मर्दों के हलक सूख जाते हैं. नाम है मुख्तार अंसारी. 
 
एक ऐसा गुनहगार जो गिरगिट की तरह रंग बदलता है. वक्त आए तो ये बाहुबलि नेता बन जाता है. वक्त आए तो ये बेहरहम कातिल बन जाता है. और तो और वक्त पड़ने पर ये मजहब का ठेकेदार भी हो जाता है, लेकिन ये चाहे कोई भी शक्ल क्यों ना धरे, दुनिया जानती है कि ये शख्स और कुछ नहीं एक बेरहम खलनायक है. ऐसा खलनायक जो अपने मतलब के लिए किसी भी जुर्म को अंजाम दे सकता है. किसी भी हद तक जा सकता है.
 
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साल 2005 में मुख्तार ने अकेले दम पर मऊ शहर के चेहरे पर वो दाग दे दिया जो धुले नहीं धुलेगा. इस शैतान खोपड़ी ने पूरे मऊ इलाके में न सिर्फ सांप्रदायिक दंगे भड़का दिए बल्कि उस पर खुद उस भीड़ की अगुवाई करने का आरोप भी लगा जिसके हाथ मासूमों के खून से सने थे.
 
इंडिया न्यूज के शो ‘खलनायक’ में देखिए मुख्तार अंसारी की कहानी.