नई दिल्ली. आज हम आपके सामने एक ऐसा रहस्य लेकर आए हैं जो किसी को भी हैरान करने की ताकत रखता है. एक ऐसा मंदिर जहां ईश्वर का चमत्कार हर तरफ दिखाई देता है. जहां विज्ञान के सिद्धांत फेल हो जाते हैं. जहां हर पल चमत्कार होता दिखाई देता है. ये ओडिशा के पुरी शहर का जगन्नाथ मंदिर है. पुरी का जगन्नाथ मंदिर हिंदुओं के चार धामों में से एक गिना जाता है. यहां भगवान श्रीकृष्ण अपने बड़े भाई बलराम और बहन सुभद्रा के साथ विराजते हैं. कहा जाता है कि द्वापर के बाद भगवान कृष्ण जगन्नाथ के रूप में पुरी में निवास करने लगे.
 
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जगन्नाथ मंदिर का अतीत
जगन्नाथ मंदिर का निर्माण 1174 ई. में कलिंग के राजा अनंतवर्मन चोडगंग देव ने बनवाया था. मंदिर को बनाने में कलिंग वास्तुकला का इस्तेमाल किया गया. इस मंदिर की ऊंचाई 214 फीट प्रांगण का एरिया 4 लाख वर्गफीट का है.
 
हवा की उलटी दिशा में लहराता है झंडा
जगन्नाथ मंदिर के गुंबद पर लगा झंडा दिखने और लहराने में भले ही एक सामान्य झंडा लग रहा हो. लेकिन श्री जगन्नाथ मंदिर के ऊपर स्थापित झंडा सदैव हवा के विपरीत दिशा में लहराता है. वैज्ञानिकों ने इसके लिए कई तर्क दिए लेकिन हर तर्क बेकार ही साबित हुआ.
 
मंदिर के ऊपर से कोई पक्षी या विमान नहीं गुजरता
मंदिर के ऊपर गुंबद के आसपास अब तक कोई पक्षी उड़ता हुआ नहीं देखा गया. इसके ऊपर से विमान नहीं उड़ाया जा सकता. मंदिर के शिखर के पास पक्षी उड़ते नजर नहीं आते, जबकि देखा गया है कि भारत के अधिकतर मंदिरों के गुंबदों पर पक्षी बैठ जाते हैं या आसपास उड़ते हुए नजर आते हैं.
 
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इंडिया न्यूज के खास शो ‘नीला चांद‘ में देखिए जगन्नाथ मंदिर के सुदर्शन चक्र का क्या राज है?
 
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