नई दिल्ली. हिंदुस्तान के कई हिस्से ऐसे है जहां बूंद-बूंद पानी के लिए लाखों की आबादी बेचैन है. यहां के खेतों से अनाज नहीं उदासी उपज रही है और नदियां, तालाब और हैंडपंप से पानी नहीं आंसू टपक रहे हैं. उन हिस्सों में से एक हिस्सा है बुंदेलखंड जो कि दर्द से कराह रहा है.
 
बता दें कि करीब दो करोड़ लोगों से कुदरत तीन साल से रूठा है और पानी की किल्लत के चलते किसान आत्महत्या करने को मजबूर हैं. सूखे का दर्द और पानी की तड़प से इंसान टूटता, कराहता और मरता जा रहा है. वहां बस्तियों में वीरानी छा रही है और जो लोग वहां बचे हैं, वो आंसू पीने को मजबूर हैं.
 
आलम ये है कि प्राइमरी स्कूल के बच्चों को भी पानी के लिए जंग लड़नी पड़ती है. हालात यह है कि बूंद बूंद पानी के लिए तरसते बांसपुर गांव के लोग एक सूखे कुएं को जिंदा करने का जतन कर रहे हैं.
 
अकेला बुंदेलखंड ऐसा हिस्सा नहीं है देश के कई ऐसे हिस्से जैसे महाराष्ट्र का मराठवाड़ा, विदर्भ और दक्षिण भारत का चेन्नई जिनमें सूखे की मार ने आतंक मचाया हुआ है.
 
इंडिया न्यूज के खास शो ‘संघर्ष’ में मैनेजिंग एडिटर राणा यशवंत बताएंगे कि देश के हिस्सों में लोग पानी के लिए तरस रहे हैं. साथ ही उन्हें किन किन परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.
 
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