नई दिल्ली. हिंदुस्तान नदियों का देश है, बेशक ये ख्याल ही हत्यारा है क्योंकि इस बार लोगों को पानी ने मारा है. बुंदेलखंड के हिस्से में बसे मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले के उन घरों में इंसानों की जगह उदासियां रहती हैं. नदियां तालाब, हैंडपंप सूख गए हैं. बूंद-बूंद के लिए लोग बेचैन हैं. यहां पानी कहने के लिए दो शब्द हैं मगर समझने के लिए दर्द की ऐसी दास्तां जिसके शब्द-शब्द संघर्ष हैं. साझा करने के लिए एक ऐसा मुद्दा जिसके हर हिस्से में तड़प है. 
 
प्यास से तड़प रहे बुंदेलखंड का जर्रा जर्रा तकलीफ से भर देने वाला है. बुंदेलखंड का ही एक जिला है टीकमगढ़ इस जिले में जो कभी टेहरी के नाम से जाना जाता था. कभी इसी टीकमगढ़ में जामनी, बेतवा और धसान जैसी नदियां बहती थीं. झीलें हुआ करती थीं लोग किसानी करते थे. खुशहाली के गीत गाते थे. मगर अब जमीन के साथ साथ जिंदगी बंजर हो गई है. मौसम की मार ने लोगों को घर परिवार छोड़ने पर मजबूर कर दिया है. करें भी तो क्या दूर दूर तक मददगार नज़र नहीं आते. 
 
इंडिया न्यूज के खास शो में देखिए क्यों बुंदेलखंड के जिले में टीकमगढ़ बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहा है.   
 
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