चीकली गांव. पानी की कमी से तड़पता हिंदुस्तान, गरीबी से लड़ता जूझता हिंदुस्तान, गंदगी से भिड़ता हुआ हिंदुस्तान, हिदुस्तान जिसके मंसूबे, सपने, धैर्य, जज्बा..सब सरकारी फाइलों में धूल से खांसते नज़र आते हैं. लेकिन हिंदुस्तान में एक राज्य में कुछ ऐसा हुआ जिसमें हिंदुस्तान का भविष्य दिखाई दे गया. ये गांव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपनों का गांव जैसा सज रहा था, खिल रहा था, महक रहा था. चीकली गांव के विकास के लिए पिछले एक साल में कई करोड़ रुपए खर्च हुए हैं, लेकिन इस गांव में ये खर्च सरकारी फाइलों के आंकड़े जैसे नहीं हुए, यहां पर जो भी पैसे खर्च हुए उसकी एक एक पाई का हिसाब है.
 
 
ऐसे बदला चीकली गांव
चीकली गांव में 20 लाख में 450 घरों में नल के कनेक्शन लगावाए गए यहां 2 लाख खर्च कर 172 शौचालय बनवाए गए. इस गांव में 10 लाख खर्च करके दर्जनों सीसीटीवी कैमरे लगवाए गए. 6 लाख खर्च कर किया गया पौधारोपण और 20 लाख स्वच्छता के लिए खर्च किए गए. 20 लाख खर्च करके रिवरफ्रंट बनाया. चीकली गांव के विकास में पर्यावरण का खास ध्यान रखा गया है. गांव में प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाने और पर्यावरण की संरक्षा के लिए भी काम किए गए हैं. विकास की दौड़ में पर्यावरण को नजरअंदाज़ नहीं किया गया है.
 
 
चीकली गांव की सुविधाएं
चीकली गांव में सीवेज का पानी नदी में न जाए, इसके लिए फिल्टर प्लांट लगाया गया है, गांव व सड़क के किनारे पेड़ लगाए गए हैं. गांव में शवों को जलाने के लिए इलेक्ट्रिक मशीन है और आंगनवाड़ी में आधुनिक सुविधाएं मौजूद कराई गई हैं
चीकली गांव में हैलीपैड भी है. चीकली गांव में न सिर्फ विकास की सरपट दौड़ हुई बल्कि ये भी ध्यान रखा गया कि जो आखिरी इंसान है, जो गांव का सबसे गरीब इंसान है, उस तक भी विकास की ये चमक पहुंचे. चीकली गांव शायद हिंदुस्तान का इकलौता ऐसा गांव है जहां बेघरों के लिए आशियाना बनाया गया है और ये आशियाना भी एकदम अप टू डेट है.
 
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