नई दिल्ली. बार्डर सिक्योरिटी फोर्स यानि सीमा सुरक्षा बल के जवान. थार का तपता रेगिस्तान हो या फिर कश्मीर में बर्फ से ढंकी वादियां, BSF के जवान बिना रुके बिना थके करते हैं सरहदों की सुरक्षा करते हैं लेकिन BSF में भी एक खास विंग होती है कंमाडोज़ की, जो सरहद पर तो तैनात होते ही हैं साथ ही देश में घुसपैठ करने वाले आतंकियों और देश को नुकसान पहुंचाने वालों को भी सीधे मौत के घाट उतार देते हैं.
 
ये ट्रेनिंग इतनी मुश्किल होती है कि हर साल महज़ कुछ ही जवान कंमाडोज़ बनते हैंऔर BSF का एक एक कमांडो दुश्मन के 10-10 सैनिकों पर भारी पड़ता है. 
 
BSF के जवानों को दुनिया के सबसे अत्याधुनिक हथियारों को भी चलाने की ट्रेनिंग दी जाती है. BSF के इन ट्रेनी कंमाडोज का निशाना इतना अचूक होता है कि सिर्फ एक गोली कर देती है दुश्मन का काम तमाम कर देते हैं. BSF के इन कंमाडोज़ को निशाना लगाने की ट्रेनिंग पूरी तरह से कंप्यूटराइज्ड होती है.
 
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