इलाहाबाद : 2008 आरुषि हत्याकांड की गुत्थी एक बार फिर उलझ गई है, 2013 में ट्रायल कोर्ट ने राजेश और नुपुर तलवार को उम्रकैद की सजा दी थी लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि परिस्थितियों और सबूतों के अभाव में दंपत्ति को दोषी करार नहीं दिया जा सकता है और अदालत ने तलवार दंपत्ति को बरी कर दिया है. अब मुद्दा ये है कि अगर आरुषि को मम्मी-पापा ने नहीं मारा तो आखिर किसने मारा ? और क्या आरोपी का चेहरा कभी सामने आ पाएगा.
 
क्या सबसे बड़ी मर्डर मिस्ट्री पर से पर्दा उठ पाएगा, हाईकोर्ट में सीबीआई की थ्योरी फेल हो गई है. इलाहाबाद हाईकोर्ट का कहना है कि सबूतों की कड़ियां पूरी नहीं है. मर्डर केस की शुरुआती जांच यूपी पुलिस ने की थी. इस दौरान उसने ऐसी-ऐसी गलतियां की, जिसके चलते आज तक कातिल का पता नहीं चला सका है.

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