नई दिल्ली: कार्तिक पूर्णिमा के ठीक बाद उत्पन्ना एकादशी आती है, इस साल उत्पन्ना एकादशी 14 नवंबर 2017 को है. ऐसा कहा जाता है कि इस एकादशी से ही एकादशी व्रत की शुरुआत हुई थी. ऐसी मान्यता है कि सतयुग में एकादशी वाले दिन ही भगवान विष्णु के देह से एक देवी की उत्पत्ति हुई थी. यही वजह है कि इस एकादशी को उत्पन्ना एकादशी के नाम से भी जाना जाता है. बता दें कि भगवान विष्णु के शरीर से उत्पन्न हुई इसी देवी ने ही उनकी जान बचाई थी. भगवान विष्णु ने खुश होकर इस देवी को एकादशी का नाम दिया था. जो भी भक्त उत्पन्ना एकादशी व्रत रखता है उसे सभी पापों से मुक्ति मिलती है.

उत्पन्ना एकादशी शुभ मुहूर्त

एकादशी व्रत तिथि – 14 नवंबर 2017
एकादशी तिथि प्रारंभ- 13 नवंबर प्रारंभ- 12:25 बजे से 14 नवंबर 12:35 बजे तक.
पारण का समय – 06:47 से 08:54 बजे तक (15 नवंबर 2017)
पूजन मंत्र: ॐ मुरा-रातये नमः॥

एक साल में कुल 24 एकादशियां आती हैं और इनमें से पहली एकादशी मार्गशीर्ष माह की कृष्ण पक्ष को आती है. उत्पन्ना एकादशी इस दिन प्रात:काल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सबसे पहले व्रत का संकल्प करें और भगवान का पूजन करें, व्रत कथा सुनें. शास्त्रों के मुताबिक, जो भी व्यक्ति इस दिन एकादशी के दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु के संग एकादशी देवी की पूजा करता है उसके कई जन्मों के पाप कट जाते हैं और व्यक्ति उत्तम लोक में स्थान पाने का अधिकारी बन जाता है.

उत्पन्ना एकादशी व्रत कथा 
एक भयानक राक्षस ने अपनी शक्तियों से स्वर्ग पर कब्जा कर लिया था. राक्षस का नाम मुर था, इसके पराक्रम से स्वर्ग में कोई भी देवता टिक नहीं पाया था. जिसके बाद सभी देवतागण भोलेनाथ के पास गए और उन्हें पूरी गाथा सुनाई. तभी भगवान शिव ने सभी को भगवान विष्णु के पास जाने को कहा. तभी सभी देवतागण क्षीरसागर पहुंचे. वहां देखा कि विष्णु गहरी नींद में थे. सभी देवों ने विष्णु भगवान के जगने के इंतजार किया. जब भगवान विष्णु गहरी निंद्रा से जागे तो देवताओं ने वृतांत सुनाई.

जिसके बाद विष्णु भगवान सोच में पड़ कि ऐसा कौन सा राक्षस है जिसने सभी देवताओं को स्वर्ग से निकलने पर विवश कर दिया. तभी विष्णु भगवान राक्षस का वध करने गए तो विष्णु जी के शरीर से एक देवी का जन्म हुआ. और उन्होंने मुर राक्षस का वध कर दिया. तब भगवान विष्णु ने प्रसन्न होकर कहा कि ये कन्या एकादशी के दिन उत्पन्न हुई है इसीलिए तुम्हें उत्पन्ना एकादशी के नाम से जाना जाएगा. साथ ही इस दिन जो भी व्यक्ति पूरी निष्ठा-भाव के साथ व्रत और पूजा करेगा, उसकी सभी मनोकामना पूरी होंगी.

कालभैरव अष्टमी 2017: कालभैरव के 5 मंदिर जहां पूजा करने से पूर्ण होती हैं सभी मनोकामनाएं