नई दिल्ली : मार्गशीर्ष पूर्णिमा 2017, कार्तिक माह की तरह इस मार्गशीर्ष माह को पवित्र माह माना जाता है. आप लोगों की जानकारी के लिए बता दें कि मार्गशीर्ष महीना श्रद्धा और भक्ति का महीना माना जाता है. शास्त्रों के मुताबिक, इस महीने को श्री कृष्ण का माह माना जाता है. सनातम धर्म के अनुसार, सतयुग काल का प्रारंभ देवताओं ने मार्गशीर्ष माह की पहली तिथि को हुआ था. शायद आप लोग इस बात से अंजान हो लेकिन मार्गशीर्ष पूर्णिमा को बत्तीसी पूर्णिमा भी कहा जाता है. ऐसा माना जाता है कि मार्गशीर्ष माह से ही सतयुग काल की शुरुआत हुई थी, आज हम आपको बताएंगे कि इस दिन स्नान, दान आदि करने से बत्तीस गुना फल प्राप्त होता है, यही कारण है कि मार्गशीर्ष पूर्णिमा को बत्तीसी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है.

बता दें कि मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन व्रत और पूजन करने से सुखों की प्राप्ति होती है. आप लोगों की जानकारी के लिए बता दें कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा पूरे विधि विधान के साथ की जाती है. सफेद रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए. अगर संभव हो सके तो किसी योग पंडित से ही पूजा कराएं. मार्गशीर्ष पूर्णिमा वाले दिन सत्यनारायण की कथा सुनना और पढ़ना बेहद ही शुभ माना जाता है.

भगवान विष्णु की पूजा करने से पहले पूजा की थाली में धूप, दीप जरूर रख लें. बता दें कि भगवान विष्णु को चूरमा का भोग बेहद प्रिय है, प्रसाद लगाने के बाद चूरमा के प्रसाद को सभी में वितरित करें. मार्गशीर्ष पूर्णिमा वाले दिन ब्रह्मणों को दान-दक्षिणा दी जाती है. ऐसी मान्यता है कि जो भी भक्त इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करता और व्रत रखता है, उसकी सभी मनोकामनाएं भगवान विष्णु पूरी करते हैं.

मार्गशीर्ष पूर्णिमा 2017: इस विधि से करें भगवान विष्णु की पूजा, पूरी होंगी सभी मनोकामनाएं