नई दिल्ली : चंद्र ग्रहण के बाद अब 21 अगस्त को सूर्य ग्रहण लगेगा. आपके भी जहन में अगर ग्रहण को लेकर ये सवाल उठता है कि आखिर इसका मतलब क्या है तो आइए हम आपको बताते हैं कि वैज्ञानिकों का क्या कहना है, उनका कहना है कि यादि कोई खगोलीय पिंड का पूर्ण अथवा आंशिक रूप किसी अन्य पिंड से ढक जाता है या पीछे आ जाता है तो उससे ग्रहण कहते हैं.
 
सूर्य ग्रहण उस वक्त होता है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है, इसके तीन प्रकार होते हैं. पहला पूर्ण सूर्य ग्रहण, ये स्थिति उस वक्त उत्पन्न होती है जब चंद्रमा पृथ्वी को पूरी तरह से अपनी छाया में ले लेता है. ऐसे में सूर्य की किरणें धरती पर नहीं पहुंच पाती और अंधेरा छा जाता है.
 
 
दूसरा, आंशिक सूर्य ग्रहण होता है, इसमें चंद्रमा सूर्य के कुछ हिस्से को ढक लेता है, ऐसी स्थिति के समय पृथ्वी के कुछ हिस्सों में सूर्य नजर नहीं आता है. तीसरे ग्रहण को वलयाकार सूर्य ग्रहण कहते हैं, इसमें चंद्रमा सूर्य को इस प्रकार से ढक लेता है कि सूरज का मध्य हिस्सा ही इससे ढक पाता है और सूर्य का बाहरी हिस्सा दिख रहा होता है. बता दें कि ज्योतिषों के अनुसार, सूर्य ग्रहण अमावस्या के दिन होता है.
 
क्या है सूर्य ग्रहण का समय
 
21 अगस्त को रात 9 बजकर 16 मिनट पर सूर्य ग्रहण प्रारंभ होगा और रात्रि 2.34 बजे समाप्त होगा. बता दें कि जिन देशों में ग्रहण दिखाई देगा वहां ग्रहण का सूतक 12 घंटे पूर्व यानी 21 अगस्त सुबह के 11.51 बजे से लग जाएगा. ऐसा कहा जा रहा है कि ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा लेकिन इसका प्रभाव जरूर राशियों पर पड़ेगा.
 
जिन लोगों की कुंडली में कालसर्प दोष है या राहु-केतु की दशा-अंतर्दशा चल रही है या जिनकी कुंडली में सूर्य या चंद्र ग्रहण दोष बना हुआ है उन पर भी ग्रहण का ज्यादा असर होगा. ग्रहण का प्रभाव 30 दिनों तक रहता है।