नई दिल्ली : हिंदू धर्म में एकादशी का एक खास महत्व है, आज श्रावण मास शुक्ल पक्ष की एकादशी है. बता दें कि इस एकादशी को पुत्रदा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है. सावन माह में इस एकादशी का विशेष महत्व है. आप भी अगर संतान प्राप्ति की कामना रखते हैं तो पुत्रदा एकादशी का व्रत जरूर रखें.
 
ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को संतान की सुरक्षा के लिए भी रखा जाता है, साथ ही इस व्रत को ‘पापनाशिनी व्रत’ के नाम से भी जाना जाता है. माताएं अपने बच्चों की मंगल कामना के लिए भी इस व्रत को रखती हैं. 
 
 
व्रत की विधि
  • पुत्रदा एकादशी व्रत करने वालों को एकादशी से एक दिन पूर्व दशमी से ही नियमों का पालन शुरू कर देना चाहिए. ऐसा करने से व्रत सफल माना जाता है. 
  • दशमी के दिन सुर्यास्त से पहले तक खाना खा लें. सू्र्यास्त के बाद भोजन न करें. 
  • दशमी के दिन नहाने के बाद बिना प्याज-लहसून से बना खाना खाएं.
  • एकादशी के दिन स्नान करके व्रत का संक्लप लें.
  • प्रसाद, धूप, दीपआदिस से पूजा करें और पुत्रदा एकादशी व्रत कथा का पाठ करें.
  • दिन भर निराहार व्रत रखें और रात में फलाहारी करें. 
  • द्वादशी के दिन ब्राह्मण को भोजन कराकर उसके बाद स्नान करके सूर्य भगवान को अर्घ्य दें उसके बाद पारन करें.