पटना. एक तरफ रामनवमी और मुहर्रम को लेकर जहां कई शहर में लोग दहशत और प्रशासन तनाव में रहता है वहीं बिहार के बेगूसराय में जिस दुर्गा प्रतिमा विसर्जन जुलूस को पुलिस ने मुसलमानों की बस्ती से गुजरने से रोक दिया था, उसी बस्ती के मुस्लिमों लोगों ने शर्बत-पानी का इंतजाम करके जुलूस की अगवानी की.
 
बिहार के न्यूज़ वेबसाइट www.livebegusarai.in में छपी रिपोर्ट के मुताबिक बेगूसराय जिले के गढ़पुरा प्रखंड में पुलिस ने दुर्गा पूजा के बाद प्रतिमा विसर्जन के जुलूस को मुसलमानों की घनी आबादी वाली एक बस्ती से गुजरने पर रोक लगा दी. पुलिस ने कहा कि ऐसा करने पर तनाव की स्थिति पैदा हो सकती है इसलिए एहतियातन ऐसा नहीं किया जाए.
 
मुसलमानों की बस्ती से खुद चलकर गए लोग और कहा, आप आओ हमारे यहां
 
इस बात की खबर जब मुसलमानों की बस्ती तक पहुंची तो बस्ती के वरिष्ठ लोगों ने खुद से पहल की और पुरानी दुर्गा पूजा समिति के लोगों तक गए और कहा कि आप बेफिक्र होकर हमारे मोहल्ले से प्रतिमा को लेकर जाइए. मो. सलाउद्दीन की अगुवाई में गए दर्जनों मुसलमान युवकों ने दुर्गा पूजा समिति से कहा कि आप हमारी गली से गुजरो, हम स्वागत करेंगे.
 
हिन्दू-मुसलमान एकता के इस खुले इजहार के बाद तो पुलिस वाले भी हैरान थे. फिर क्या था, मां दुर्गा की प्रतिमा के साथ जुलूस निकला और मुसलमानों की बस्ती से गुजरा. जुलूस में शामिल लोगों की खुशी का उस समय कोई ठिकाना नहीं रहा जब मुसलमानों की बस्ती में मुस्लिम नौजवान उनके गले को तर करने के लिए शर्बत-पानी का स्टॉल लगाकर उनका इंतजार कर रहे थे.
 
रहबर यूथ सोसाइटी के बैनर तले मुसलमानों की बस्ती में जुलूस में शामिल सैकड़ों लोगों के लिए शर्बत-पानी के साथ-साथ प्राथमिक उपचार वगैरह तक का प्रबंध किया गया था. आपसी सद्भाव और भाई-चारा की यह मिसाल देश के दूसरे हिस्सों में समय-बेसमय पैदा होने वाले तनाव में शामिल लोगों के लिए एक सीख है.