नई दिल्ली. उप-राज्यपाल नजीब जंग ने मंगलवार को ने तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया जो माननीय उच्च न्यायालय के 4 अगस्त, 2016 के निर्णय के पश्चात् उनके पास आयीं 400 से अधिक फाईलों में हुई कमियों और अनियमितताओं की जांच करेगी.
 
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इस तीन सदस्यीय कमेटी में श्री वी.के शुंगलू, पूर्व नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक, श्री एन.गोपाल स्वामी, पूर्व चुनाव आयुक्त एवं श्री प्रदीप कुमार, पूर्व मुख्य सर्तकता आयुक्त जैसे प्रमुख व्यक्ति शामिल हैं. यह कमेटी फाईलों में हुई त्रुटियों की जांच करेगी एवं व्यक्तिगत तौर पर उत्तरदायित्व भी निर्धारित करेगी एवं यदि कोई सिविल या अपराधिक मामला हुआ तो उसका उत्तरदायित्व भी निर्धारित करेगी. कमेटी 6 सप्ताह के अंदर अंतिम रिपोर्ट देगी.
 
दिल्ली उच्च न्यायालय ने उपराज्यपाल के विचार/ अनुमति के बिना स्वीकृत कुछ आदेशों को अवैध बताया है. तीन सदस्यीय कमेटी जिसमें श्री वी.के शुंगलू, पूर्व नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक, श्री एन.गोपाल स्वामी, पूर्व चुनाव आयुक्त एवं श्री प्रदीप कुमार, पूर्व मुख्य सर्तकता आयुक्त जैसे प्रमुख व्यक्ति शामिल है जो पिछले कई दशकों से सार्वजनिक जीवन में है और जिन्होंने पूरी निष्ठा व ईमानदारी से सार्वजनिक सेवा की है. दिल्ली सरकार के प्रधान सचिवों/विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए गए कि ऐसे सभी मामलें, जहां नियमानुसार उपराज्यपाल महोदय की पूर्वानुमति जरूरी थी लेकिन नहीं ली गई है, उनके समक्ष लाया जाए.
 
इसके बाद दिल्ली सरकार से लगभग 400 फाईलें उपराज्यपाल महोदय की एक्स पोस्ट फेक्टो स्वीकृति हेतु सचिवालय में प्राप्त हुई. ऐसी और फाईलें आने की संभावना है. इन फाईलों की प्रारम्भिक जांच के पश्चात पाया कि पिछले डेढ वर्षो में फाईलों पर कुछ ऐसे निर्णय लिए गए जो कि अधिनियमों/नियमों के विरूद्ध है एवं जिनमें कानूनी एवं वित्तीय पहलू निहितार्थ हैं. उन फाईलो को गहराई से जांच करना एवं अग्रिम कार्यवाही का सुझाव देना आवश्यक हो गया है इसलिए इस कमेटी का गठन किया गया है.
 
यह कमेटी विस्तारपूर्वक निम्न पहलू देखेगी:
1. कमेटी यह निर्धारित करेगी कि इन फाईलों में लिए गए निर्णय एवं अपनाई गई प्रक्रियों में अधिनियमों/नियमों का उल्लंघन और दिल्ली सरकार के लिए संवैधानिक योजना है या नहीं.
 
2. कमेटी यह निर्धारित करेगी कि ऐसे उल्लंघन गलत, गैर कानूनी एवं जानबूझकर की गई गलतियां हैं या नहीं.
 
3. कमेटी इन उल्लंघनों से संबंधित दिल्ली सरकार के अधिकारियों/सार्वजनिक पदाधिकारों की भूमिका की भी जांच करेगी एवं उनका उत्तरदायित्व निर्धारित करेगी.